पंजाबियों से 10 गुना ज्यादा नॉन-वेज खाते हैं बिहारी, सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा

Atul Gupta, Last updated: Wed, 10th Nov 2021, 8:55 PM IST
  • पंजाबियों के बारे में धारणा है कि पंजाबी सबसे ज्यादा नॉन-वेज खाते हैं लेकिन सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसके मुताबिक पंजाब में 67 फीसदी लोग वेजिटेरियन हैं जबकि बिहार में पंजाब से दस गुना ज्यादा नॉन-वेज खाया जाता है. बिहार की सिर्फ 7.5 फीसदी जनता वेजिटेरियन है.
पंजाबियों से ज्यादा बिहारी होते हैं नॉन वेज लवर्स (फोटो- सोशल मीडिया)

पटना: अक्सर हम किसी खास जगह या खास समुदाय के प्रति एक धारणा बना लेते हैं कि ये तो वैसे ही होंगे. जैसे बिहार के बारे एक धारणा बना ली गई है कि यहां के लोग तो सिर्फ रिक्शा ही चलाते हैं या लिट्टी चोखा ही खाते हैं जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है. वैसी ही कुछ धारणा पंजाब के बारे में है कि पंजाब में हर कोई बटर चिकन ही खाते हैं लेकिन जैसा कहा गया कि ये सिर्फ धारणा की बात है. इंडिया टुडे ने देश के किस राज्य में सबसे ज्यादा वेजिटेरियन हैं इसको लेकर एक सर्वे किया है जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब से कहीं ज्यादा नॉन वेज बिहार में खाया जाता है. बल्कि आंकड़े ये भी बताते हैं कि पंजाब में ज्यादातर लोग वेजिटेरियन हैं. बल्कि यूं कहें कि पंजाब में गुजरात से ज्यादा शाकाहारी लोग हैं. वहीं चौंकाने वाली बात ये है कि बिहार उन चुनिंदा राज्यों में हैं जहां सबसे ज्यादा नॉन-वेज खाया जाता है. 

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आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में 67 पर्सेंट और गुजरात में 61 पर्सेंट लोग वेजिटेरियन हैं जबकि बिहार में सिर्फ और सिर्फ 7.5 फीसदी लोग ही वेजिटेरियन हैं. हालांकि बिहार की बात करें तो यहां ज्यादातर मछली खाने का चलन है क्योंकि बिहार में नदियां और पोखरों की बहार है इसलिए मछली की पैदावार भी ज्यादा होती है. इसके बाद लोग मटन और फिर आखिर में चिकन खाना पसंद करते हैं. ज्यादातर लोग मछली खाना पसंद करते हैं. वहीं देशभर की बात करें तो पूरे देश में 29 फीसदी लोग ही वेजिटेरियन हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में सबसे ज्यादा 75 प्रतिशत लोग वेजिटेरियन हैं. वहीं लक्ष्यद्वीप में जीरो प्रतिशत और तमिलनाडू में 2.3 फीसदी लोग वेजिटेरियन हैं. तो अगली बार किसी राज्य या किसी समुदाय के प्रति धारणा बनाने से पहले ध्यान रखिएगा कि धारणा सिर्फ धारणा होती है, जरूरी नहीं की वो सही भी हो. वैसे वेज या नॉन-वेज खाना पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है जिसपर किसी तरह की टीका-टिप्पणी नहीं होनी चाहिए.

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