क्या सुशील मोदी नाराज हैं ? नीतीश के शपथ में क्या किया, क्या नहीं, पढ़िए, समझिए

Smart News Team, Last updated: 16/11/2020 11:08 PM IST
  • बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के तीन कार्यकाल में डिप्टी सीएम रहे सुशील कुमार मोदी चौथे टर्म में उप-मुख्यमंत्री नहीं रहे. उनकी जगह बीजेपी के ही तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने ले ली है.
पटना एयरपोर्ट पर गृहमंत्री अमित शाह का स्वागत करते पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी

पटना. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने फिर से सत्ता की बागडोर संभाल ली है. बस एक चीज मिसिंग है और वो हैं डिप्टी सीएम के तौर पर नीतीश के पार्टनर रहे सुशील कुमार मोदी. नीतीश ने शपथ के बाद मीडिया से कहा भी कि वो सुशील मोदी को मिस करेंगे लेकिन ऐसा क्यों हुआ है ये सवाल बीजेपी से पूछा जाए. 

जाहिर है, गठबंधन धर्म से बंधे नेता के तौर पर सीएम नीतीश इससे ज्यादा नहीं बोल सकते लेकिन बीजेपी कैंप में भी ये साफ है कि इस फैसले से नीतीश भी बहुत खुश या सहज नहीं हैं. बीजेपी में कुछ नेता और कार्यकर्ता हैं जो ये मानते हैं कि सुशील कुमार मोदी नीतीश सरकार में बीजेपी कोटे से डिप्टी सीएम तो बनते हैं लेकिन काम जेडीयू नेता या नीतीश के लोग की तरह करते हैं.

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पूरे बिहार की नजर पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर थी जिन्होंने शपथ ग्रहण से एक दिन पहले ही ट्वीट करके अपना मूड और नाराजगी जाहिर कर दिया था कि उनसे कार्यकर्ता का पद तो कोई नहीं छीन सकता. अगर इसे उलट कर पढ़ें तो डिप्टी सीएम का पद छीन लिया गया. तो देखिए नीतीश की नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण के दिन सुशील मोदी ने राजनीति के मैदान में क्या किया और क्या नहीं किया.

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नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण के लिए गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, बीजेपी के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव और बिहार चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस पटना पहुंचे थे. पटना एयरपोर्ट पर अमित शाह और जेपी नड्डा के स्वागत के लिए सुशील मोदी पहुंचे, स्वागत किया और वापस लौट गए. 

सुशील मोदी के अलावा बाकी सारे बड़े नेता बीजेपी के प्रदेश कार्यालय गए जहां अमित शाह और जेपी नड्डा राजभवन जाने से पहले कुछ देर रुके. सुशील मोदी नहीं गए. वो एयरपोर्ट से निकलने के बाद गर्दनीबाग में एक चित्रगुप्त पूजा कार्यक्रम में शामिल होने चले गए. पार्टी कार्यालय से नेताओं का काफिला राजभवन पहुंचा और सुशील मोदी चित्रगुप्त पूजा में शामिल होकर राजभवन गए.

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राजभवन में सुशील मोदी ने समझदार नेता की खामोशी ओढ़ ली. मीडिया ने बार-बार पूछा, यहां तक उकसाया कि मीडिया से क्या नाराजगी है लेकिन सुशील मोदी कुछ नहीं बोले. मास्क के अंदर ही मुस्कुराते हुए आए और चले भी गए. शपथ ग्रहण में आए तो नीतीश कैबिनेट के नए मंत्रियों का अभिवादन किया और अपनी सीट पर चुपचाप बैठ गए.

शपथ ग्रहण खत्म हुआ तो चाय पार्टी में शामिल हुए लेकिन किसी से कुछ नहीं कहा. यहां तक कि वो एक आम नेता या उनके ही शब्दों में कहें तो कार्यकर्ता की तरह पार्टी के विधायकों के साथ चाय पर चर्चा करते रहे लेकिन उस तरफ नहीं गए जहां नीतीश थे. नीतीश एक घेरे में अमित शाह, जेपी नड्डा और बाकी बड़े नेताओं के साथ चाय पी रहे थे. 

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जिन नीतीश कुमार का साथ देने के लिए कुछ बीजेपी नेता और कार्यकर्ता सुशील मोदी को कोसते थे, उनकी तरफ चाय पीने तक के लिए नहीं जाना सुशील मोदी के दिल और मन की बात बताता है. वो खुश हैं, वो दुखी हैं, वो नाराज हैं, वो गुस्सा हैं, किसी को नहीं पता. उनके मन की बात के जुबां तक आने का इंतजार सबको है लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि पार्टी ने उनके लिए कुछ ना कुछ तो सोचा होगा. राज्यसभा और केंद्र में मंत्री या फिर राज्यपाल. वो ही नहीं, 8वीं बार विधायक बने बीजेपी के बिहार में वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार भी चुप हैं. 

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ऐसा नहीं है कि सिर्फ सुशील मोदी ही नीतीश की इस सरकार में नहीं हैं. उनके अलावा उनके समकक्ष रहे नंद किशोर यादव, प्रेम कुमार भी मंत्री नहीं बनाए गए हैं. हालांकि चर्चा है कि नंद किशोर यादव को विधानसभा स्पीकर बनाया जाएगा लेकिन प्रेम कुमार का क्या होगा, ये साफ नहीं है.

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