कॉमन सिविल कोड से खत्म होगा महिलाओं से भेदभाव, धर्म से वास्ता नहीं: सुशील मोदी

Smart News Team, Last updated: Sat, 10th Jul 2021, 9:50 PM IST
  • बीजेपी राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कॉमन सिविल कोड को लेकर बड़ा बयान दिया है. साथ ही कॉमन सिविल कोड देश में लागू करने को विरोध करने वालों पर निशाना भी साधा है.
सुशील कुुमार मोदी ने कॉमन सिविल कोड को लेकर बड़ा बयान दिया है

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी कॉमन सिविल कोड को लेकर बड़ा बयान दिया है. सुशील कुमार मोदी ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा है कि कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता से महिलाओ के साथ होने वाला भेदभाव खत्म हो जाएगा. साथ ही सिविल कोड का धर्म से भी कोई वास्ता नहीं है. इसके साथ ही सुशील मोदी ने कॉमन सिविल कोड का विरोध करने वाले लोगों पर भी निशाना साधा है.

सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि जो लोग धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार बनते हैं और बाबा साहेब को मानने का दावा करते हैं. वहीं लोग वोट बैंक के दबाव में कॉमन सिविल कोड का विरोध करते हैं. राज्यसभा सांसंद ने कहा कि उत्तराधिकार, विवाह, गोद लेना, तलाक और तुलाकशुदा के लिए गुजाराभत्ता संबंधी मामले और उनको निपटाने में आने वाली अड़चनें कॉमन सिविल कोड के लागू होते ही खत्म हो जाएंगी. साथ ही महिलाओं के साथ जातीय और धार्मिक आधार पर होने वाला भेदभाव भी खत्म हो जाएगा.

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सुशील कुमार मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट 1985 से अब तक 35 साल में 5 बार कॉमन सिविल कोड लागू करने को जरूरत बता चुका है. लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने इसे लागू करने में रुचि नहीं दिखाई. लोकसभा में दो तिहाई से ज्यादा बहुमत वाली राजीव गांधी की सरकार ने तो शाहबानो गुजाराभत्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर कॉमन सिविल कोड लागू करने का बड़ा अवसर खो दिया था.

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बीजेपी नेता आगे कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर ने संविधान में धारा-44 के अंतर्गत समानता पर जोर दिया है. उन्होंने 2 दिसंबर 1948 को संविधान सभा में कहा है कि हमें समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश करनी चाहिए. दिल्ली उच्च न्यायालय की ताजा टिप्पणी न केवल बाबा साहेब की भावना अनुरूप है. बल्कि तेजी से बदलते भारतीय समाज को लेकर और ज्यादा प्रासंगिक है.

 

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