गांव की सुनसान गलियां देख लेखक-निर्देशक नीरज मिश्रा को हॉरर फिल्म का आया आईडिया

Smart News Team, Last updated: Thu, 4th Feb 2021, 10:38 AM IST
  • लॉकडाउन में बिहार अपने गांव पहुंचे लेखक-निर्देशक नीरज मिश्रा को शाम होते ही सुनसान गलियां देख हॉरर फिल्म बनाने का आईडिया आया. आईडिया पर काम करते-करते उन्होनें किरदारों का चयन किया और एक महीने में फिल्म को पूरा कर लिया.
लेखक-निर्देशक नीरज मिश्रा बिहार पहुंचे और वहां की सुनसान गलियां देख उन्हें हॉरर फिल्म का आईडिया आ गया.

पटना. बिहार के सहरसा के रहने वाले फिल्म निर्देशक नीरज कुमार मिश्रा के अनुसार गांवों और शहरों में अनगिनत अच्छी कहानियां होती हैं लेकिन रूपहले पर्दे पर सिर्फ नकारत्मकता को ही दिखाना लोगों की प्राथमिकता रहती है. नीरज कुमार का कहना है कि वह सकारात्मकता और दार्शनिकता को अच्छे से दिखाने का प्रयास कर रहे हैं.

बॉलीवुड फिल्म बागी टू से लेकर तारक मेहता का उल्टा चश्मा जैसे दर्जनों धारावाहिकों के निर्देशन और लेखन में अपनी पहचान बना चुके नीरज कुमार मिश्रा बताते हैं कि जब लॉकडाउन हुआ तो सभी लोग अपने गांव की तरफ लौट रहे थे. वह भी गाड़ी चलाकर मुंबई से सहरसा आ गए. वहां रहते हुए उन्होनें देखना कि शाम होती ही गलियां सुनसान हो जाती हैं और गलियों में अनकही कहानियां तैरने लगती हैं. तभी उनके दिमाग में एक हॉरर फिल्म बनाने का आईडिया आया और उन्होनें कहानी लिख ली. 

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कहानी लेखन के साथ-साथ कलाकारों के चयन का काम भी चलता रहा और पूरी फिल्म एक महीने के अंदर तैयार भी हो गई. निर्देशक नीरज मिक्षा बताते हैं कि हमारी जिंदगी के साथ एक अलग दुनिया भी चलती है जो हमारी ही जिंदगी का हिस्सा होती है लेकिन लोग उसपर बात करने से हिचकिचाते हैं. नीरज द्वारा निर्देशित और लिखित कहानी में भोजपुरी और मैथिली भाषा का इस्तेमाल किया गया है. फिल्म में डर के साथ दार्शनिकता को दिखाया गया है. 

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नीरज फिल्म के साथ अपनी जिंदगी पर बात करते हुए बताते हैं कि उनके पिता रतीशचंद्र मिश्रा बैंक में अधिकारी थे और उनकी चाहत थी कि बेटा पढ़-लिखकर सरकारी अधिकारी बने. अधिकारी बनने के सपने के साथ नीरज दिल्ली भी पहुंचे पर हर बार इंटरव्यू पर जाकर अटक जाते थे. तंग आकर नीरज जब गांव लौट आए. तभी केबीसी सीजन वन की शुरूआत होनी थी और नीरज के पास केबीसी के प्रश्न तैयार करने के लिए फोन आया. पहली बार में ही नीरज ने 25 प्रश्न तैयार किए और वह सभी चयनित भी हुए. 

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नीरज का मानना है कि उसके बाद उनकी किस्मत खुल गई और वह 2004 में मुंबई चले गए. इसके बाद वह कभी पीछे नहीं हटे. नीरज ने पंडित रविशंकर के साथ भी काम किया है. बालाजी फिल्म, जमाई राजा, इश्क आजकल, लाडो जैसे कई धारावाहिक के लिए वह काम कर चुके हैं. अब बिहार में वह काम शुरू करने जा रहे हैं. 

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