देशभर में पैक्सों को एक ही सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा, नाबार्ड ने मांगा ब्योरा

Sumit Rajak, Last updated: Sat, 19th Feb 2022, 12:00 PM IST
  • देशभर के पैक्सों को एक ही सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा. ये पैक्स आपस में तो नहीं जुड़ेंगे, लेकिन सभी अपने सहकारी बैंकों से जुड़ जाएंगे. उसके बाद निचले स्तर की यह सहकारी समितियां सहकारिता बैंकों के एजेंट के रूप में भी काम करने लगेंगी. केंद्र सरकार पैक्सों के कंप्यूटराइजेशन की नई योजना लाने जा रही है.
फाइल फाइल फोटो

पटना. देशभर के पैक्सों को एक ही सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा. ये पैक्स आपस में तो नहीं जुड़ेंगे, लेकिन सभी अपने सहकारी बैंकों से जुड़ जाएंगे. उसके बाद निचले स्तर की यह सहकारी समितियां सहकारिता बैंकों के एजेंट के रूप में भी काम करने लगेंगी. केंद्र सरकार पैक्सों के कंप्यूटराइजेशन की नई योजना लाने जा रही है.  योजना इसी वित्तीय वर्ष में लॉन्च होगी. लिहाजा नाबार्ड के साथ राज्य सरकार को भी इस हिसाब से तैयारी करने का निर्देश दिया गया है.

इस नई योजना के आने के बाद पैक्स के कंप्यूटराइजेशन की सभी पुरानी योजनाएं इसी में मर्ज कर जाएगी. नई योजना में हर पैक्स के कंप्यूटराइजेशन पर 4.35 लाख रुपये खर्च होंगे. इस राशि का 60 प्रतिशत भारत सरकार देगी और 40 प्रतिशत बिहार सरकार को देना होगा. पहले की योजना में 5 प्रतिशत सहकारी संस्थाओं को रांची लगानी थी, नई योजना में इस शर्त को हटा दिया गया है,नई योजना के हिसाब से हाल में बिहार दौरे पर आए केंद्रीय सहकारिता सचिव ने समितियों की ऑडिट तेज करने का निर्देश दिया है. 

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हालांकि उन्होंने राज्य में समितियों की ऑडिट पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि इस मामले में बिहार सबसे आगे अब तक 8463 में 6000 पैक्सों  का ऑडिट हो चुकी है. केंद्र में नए सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी समितियों को लेकर कामकाज तेज हो गया. पहले यह विभाग केंद्र सरकार में कृषि मंत्रालय से ही जुड़ा था. मंत्रिपरिषद में हुए फेरबदल में सहकारिता विभाग को अलग कर पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका जिम्मा गृह मंत्री अमित शाह को दिया है. पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने बिहार में सबसे पहले पैक्सों के कंप्यूटराइजेशन पर काम शुरू कर दिया है.

नाबार्ड ने सभी टैक्सों का ब्यौरा मांगा

पैक्सों के कंप्यूटराइजेशन को लेकर केंद्र की पुरानी योजना शुरू नहीं हो सकी थी. लिहाजा एक बार फिर से नई योजना शुरू की गई. इसलिए नाबार्ड ने उन पैक्सों का पूरा डिटेल मांगा है.  नई योजना में कंप्यूटराइजेशन के बाद उनके सॉफ्टवेयर सरकारी बैंकों से जुड़ जाएंगे. इसके लिए नए सॉफ्टवेयर लगाने होंगे. यह सॉफ्टवेयर देशभर के  पैक्सों के लिए होंगे. लिहाजा केंद्र ने प्रति पैक्स खर्च होने वाली राशि भी तीन लाख से बढ़ाकर 4.37 लाख कर दी है.

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