रोक के बावजूद पटना में कलश-पूजा सामग्री गंगा में प्रवाहित, देखता रह गया प्रशासन!

ABHINAV AZAD, Last updated: Sat, 16th Oct 2021, 9:06 AM IST
  • शुक्रवार को मूर्ति विसर्जन के दौरान प्रशासन द्वारा तय नियम-कायदों की जमकर धज्जियां उड़ी. प्रशासन की सख्ती के बावजूद लोगों ने गंगा में फूल माला और कलश नारियल को प्रवाहित किया.
(प्रतीकात्मक फोटो)

पटना. शुक्रवार को मूर्ति विसर्जन के साथ ही दुर्गा पूजा का समापन हो गया. मूर्ति विसर्जन के दौरान नियम-कायदों की जमकर धज्जियां उड़ी. आलम यह रहा कि शुक्रवार की रात में गंगा का किनारा कलश और पूजा सामग्रियों के साथ प्लास्टिक से पट गया. बताते चलें कि मूर्ति विसर्जन मद्देनजर प्रशासन ने कृत्रिम घाट बनाया था और सख्ती के साथ पुलिस की पूरी फौज उतार दी गई थी. लेकिन गंगा को प्रदूषण से बचाने का यह दावा खोखला साबित हुआ.

इससे पहले मूर्ति विसर्जन पर प्रशासन ने गंगा की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाया था. दरअसल, गंगा में मूर्ति विसर्जन करने के साथ पूजा सामग्रियों के प्रवाहित करने पर पूरी तरह से पाबंदी थी. साथ ही नियम नहीं मानने वालों पर जुर्माने का ऐलान किया गया था. लेकिन इस सख्ती के बावजूद गंगा में फूल माला और कलश नारियल को प्रवाहित किया गया. मजेदार बात यह रही कि इस दौरान मौके पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती थी. गंगा की सुरक्षा को लेकर काम करने वाले कहते हैं कि इस लापरवाही पर जुर्माना घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट से वसूलना चाहिए.

उपचुनाव में RJD का प्रचार करने बिहार नहीं आएंगे लालू, राबड़ी देवी ने बताई ये वजह

जब इस बाबत घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट से करने की कोशिश की गई तो वह सवालों से भागते नजर आए. कचरे को लेकर घाटों पर तैनात मजिस्ट्रेट का कहना है कि वह जब से ड्यूटी पर आए हैं एक भी कलश या पूजा सामग्री नदी में नहीं प्रवाहित की गई है. लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासनिक अधिकारी ड्यूटी पर अगर इतने गंभीर हैं तो फिर रोक के बाद भी नदी में पूजा सामग्रियों का विसर्जन कौन कर रहा है. बताते चलें कि गंगा में प्लास्टिक कचरा से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है. मूर्ति विसर्जन के दौरान पूजा सामग्री में सबसे अधिक प्लास्टिक ही गंगा में प्रवाहित किया गया है.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें