बिहार में इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल की भी पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स, तीसरे सेमेस्टर से शामिल किए ये चैप्टर

Shubham Bajpai, Last updated: Sun, 3rd Oct 2021, 8:33 AM IST
  • बिहार में एक नया प्रयोग करते हुए इंजीनियरिंग कालेज में इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल के भी कई चैप्टर पढ़ाए जा रहे हैं. इन चैप्टर की शुरुआत तीसरे सेमेस्टर से की जा रही है. इसको जोड़ने का मकसद है कि स्टूडेंट्स शोध में बायोमेडिकल पर शोध के लिए प्रेरित हो.
बिहार में इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल की भी पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स

पटना. बिहार में इंजीनियर बन रहे स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग कालेज इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल से जुड़े कई चैप्टर पढ़ा रहे हैं. जिससे स्टूडेंट्स आगे शोध में बायोमेडिकल से जुड़े विषयों पर शोध करने को प्रेरित हो सके. इंजीनियरिंग कालेज तीसरे से सातवें सेमेस्टर के स्टूडेंट्स को मेडिकल से जुड़े चैप्टर पढ़ा रहे हैं. इन स्टूडेंट्स के सिलेब्स में बायोलॉजी फॉर इंजीनियर्स कोर्स को जोड़ा गया है. इस कोर्स में स्टूडेंट्स को डीएनए से शुरुआत करके आरएनए, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, सिग्नल सिस्टम और शरीर के बॉडी मॉलिक्यूक्स से जुड़े कई विषय पढ़ाए जा रहे हैं.

हर स्ट्रीम में अलग समय पर होती शुरुआत

मेडिकल सिलेब्स की शुरुआत हर स्ट्रीम में अलग सेमेस्टर में होती है. सिविल और मैकेनिकल के स्टूडेंट्स को तीसरे सेमेस्टर से, इलेक्ट्रिकल के स्टूडेंट्स को चौथे सेमेस्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स के स्टूडेंट्स को छठे सेमेस्टर और कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट्स को सातवें सेमेस्टर से उनके कोर्स में मेडिकल स्टडी की शुरुआत की जाती है.

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गति, वेग के साथ सीख रहे जेनेटिक्स और बॉडी माइक्रोमॉलिक्यूल्स के गुण

भागलपुर इंजीनियरिंग कालेज के सहायक प्रोफेसर देवनाथ कुमार ने बताया कि स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग के साथ मेडिकल की भी पढ़ाई कर रहे हैं. इसमें स्टूडेंट्स जेनेटिक्स, बायो मॉलिक्यूल्स, एंजाइम, माइक्रोमॉलिक्यूल्स एनालाइसिस, इंफारमेशन ट्रांसफर, मेटाबॉलिज्म, माइक्रोबायोलॉदी समेत कई विषय पढ़ाए जा रहे हैं. यह पहल आईआईटी और एनआईटी में बायोमेडिकल पर शोध को बढ़ावा दे रहे हैं.

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स्टूडेंट्स विकसित कर रहे हैं मेडिकल से जुड़ी तकनीक

बता दें कि भागलपुर ट्रिपल आईटी के निदेशक और उनकी टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सॉफ्टवेयर बनाया है जिससे सेकेंड के समय में कोरोना का पता चल जाता है. इसको अब सिर्फ आईसीएमआर की सहमति का इंतजार है. वहीं, आईटी के सहायक प्रोफेसर डॉ. सदीप राज ने एक्सरे और चेस्ट से जुड़ी बीमारी का पता लगाने का सॉफ्टवेयर विकसित किया है.

 

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