कोरोना के चलते लंबे समय बाद बच्चों का घर से निकलना है वायरल फीवर का मुख्य कारण!

ABHINAV AZAD, Last updated: Fri, 10th Sep 2021, 5:42 PM IST
  • विशेषज्ञों ने कोरोना महामारी के चलते लम्बे समय तक स्कूलों के बंद पड़े होने को जिम्मेदार माना है. लगभग डेढ़ साल बाद खुले स्कूलों में कोरोना संक्रमण से संबंधित सरकारी गाइडलाइन जैसे दो गज की दूरी, मास्क और हाथ सैनिटाइजेशन की अनदेखी करना वायरल फीवर को तेजी से बुलावा देना बताया है.
(प्रतिकात्मक फोटो)

पटना. बिहार में वायरल फीवर के तेजी से बढ़ते मामलों की वजह का पता चल गया है. विशेषज्ञों ने कोरोना महामारी के चलते लम्बे समय तक स्कूलों के बंद पड़े होने को जिम्मेदार माना है. लगभग डेढ़ साल बाद खुले स्कूलों में कोरोना संक्रमण से संबंधित सरकारी गाइडलाइन जैसे दो गज की दूरी, मास्क और हाथ सैनिटाइजेशन की अनदेखी करना वायरल फीवर को तेजी से बुलावा देना बताया है. पटना के सिविल अस्पताल की सर्जन डा. विभा कुमारी सिंह ने बताया कि उन्होंने राजधानी के प्रख्यात शिशु रोग विशेषज्ञों के साथ अचानक वायरल फीवर के मामले बढ़ने पर विचार-विमर्श किया है. इन डाक्‍टरों का कहना है कि बच्‍चे लंबे समय के बाद घर से बाहर निकलने और स्‍कूल आने की वजह से ही बीमार पड़ रहे हैं.

पटना के कई डाक्टरों का मानना है कि यदि स्कूल लगातार खुले रहते तो बहुत से बच्चों में वायरस के प्रति हर्ड इम्युनिटी विकसित हो गई होती और एक साथ इतने लोग अस्पताल में भर्ती नहीं होते. उनका मानना था कि अगस्त-सितंबर महिनें में हर साल वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ता है. पिछले साल से लगातार जारी रहे लाकडाउन की वजह स्कूल बंद रहे और स्कूली बच्चे भी अपने घर में ही रहे. लेकिन लाकडाउन के पहले जब स्कूल खुले रहते थे और उस दौरान बच्चे फ्लू से संक्रमित किसी और बच्चे के संपर्क में कई आते थे तो कुछ बच्चों को फ्लू का संक्रमण बिना लक्षण के होता और कुछ में हल्की सर्दी-खांसी और बुखार के बाद अपने आप उनमें उस फ्लू के वायरस के खिलाफ एंटीबाडी विकसित हो जाती थी. यह श्रृंखला बढ़ते बढ़ते उनके शरीर में हर्ड इम्युनिटी विकसित कर देती थी, इसलिए एकसाथ इतने बच्चे बीमार नहीं हुआ करते थे.

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यह वायरस बच्चों में ज्यादातर उनके नाक और मुंह से प्रवेश करते हैं. ऐसे में स्कूल खुलने पर एक साथ कई बच्चें लंबे समय बाद इकट्ठे हुए और इसको लेकर स्कूल प्रबंधन सजग नहीं हो पाया. यह जानते हुए कि अभी कोरोना वायरस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया गया है. स्कूल प्रबंधन को पहले से सरकार की तरफ से निर्देश मिला है कि वह छात्र-छात्राओं से अनिवार्य रूप से कोविड गाइडलाइन का पालन करवाएंगे. सभी बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने से पहले उनके हाथ को अच्छी तरह सैनिटाइज करेंगे, सभी को मास्क पहनना अनिवार्य करेंगे और स्कूल कक्ष में दो गज की दूरी पर बच्चों को बैठाएंगे मगर स्कूलों में इनमें से किसी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया. यदि स्कूल प्रबंधन कड़ाई से इन गाइडलाइन का पालन कर होता तो स्कूली बच्चे वायरल फीवर की चपेट में इतनी आसानी से नहीं आते.

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