नीतीश कुमार सरकार ने डीजल अनुदान किया बंद, किसानों की मुसीबत बढ़ी

Smart News Team, Last updated: 04/12/2020 12:05 PM IST
  • डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान किसानों को बिहार की नीतीश सरकार एक और झटका दिया है. दरअसल नीतीश सरकार ने किसानों को मिलने वाले डीजल अनुदान को बंद कर दिया है. सरकार के इस फैसले से राज्य के किसानों की मुसीबत बढ़ गई है.
नीतीश सरकार ने डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच किसानों को मिलने वाले डीजल अनुदान को बंद कर दिया है

डीजल कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परेशान बिहार के किसानों के सामने एक और मुसीबत खड़ी हो गई है. दरअसल बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने राज्य के किसानों को मिलने वाले डीजल अनुदान को बंद कर कर दिया है. खरीफ की फसल में राज्य के किसानों को सरकार की तरफ से डीजल अनुदान नहीं मिला. बता दें कि डीजल की कमत बढ़ने पर नीतीश सरकार ने किसानों को मिलने वाले अनुदान की राशि को बढ़ा दिया था.

बता दें की नीतीश सरकार राज्य के किसानों को तीन सिंचाई के लिए प्रति लीटर 60 रुपये की दर से अनुदान देती थी. लेकिन लगभग दस वर्षों से हर साल चल रही यह योजना इस वर्ष बंद हो गई. हालांकि लाभार्थियों की संख्या देखकर लगता है कि सरकार ने गत वर्ष ही इस योजना को बंद करने का मन बना लिया था. गत वर्ष अनुदान के लिए 11.64 लाख किसानों ने आवेदन किया था. नीतीश सरकार ने मात्र 6.37 लाख को ही इसका लाभ दिया. इसके पहले वर्ष 2018-19 में 42.32 लाख किसानों ने आवेदन किया था और 30.32 लाख किसानों को इसका लाभ मिला था.

नीतीश सरकार का मानना है कि पिछले वर्ष खरीफ में बरसात हुई थी. लिहाजा अनुदान देने की जरूरत नहीं पड़ी. लेकिन रबी सीजन में अनुदान हीं देने पर सरकार कोई तर्क नहीं दे पा रही है और न ही कृषि अधिकारी भी दे पा रहे हैं. राज्य के कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने बिजली की प्रचुर उपलब्धता को इसका कारण बताया. यह सही है कि इस वर्ष खरीफ सीजन में सितंबर तक 14 फीसदी अधिक वर्षा हुई. लेकिन यह भी सच है कि अगस्त में राज्य में 29 फीसदी वर्षा की कमी थी.

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मालूम हो कि सरकार अनुदान किसानों को सिर्फ सिंचाई के लिए डीजल पर देती थी. लेकिन किसानों की डीजल पर निर्भरता कई और काम के लिए भी है. कटनी और दौनी के साथ बाजार तक पहुंचाने में ट्रैक्टर आदि में भी डीजल का ही उपयोग होता है. हार्वेस्टर भी डीजल पर ही चलता है. धान की खेती के लिए अगस्त का महीने बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. उसी महीने में सिंचाई कर किसान खाद भी डालते हैं.

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