कोरोना काल में शहद का जमकर सेवन कर रहे लोग, 4 गुना बढ़ी मांग, क्या है राज?

Smart News Team, Last updated: Mon, 10th May 2021, 9:38 PM IST
  • भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच शहद की मांग पहले से 4 गुना बढ़ गई है,. दरअसल कोरोना काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए लोग जमकर शहद का सेवन कर रहे हैं.
कोरोना काल में शहद की मांग में आई तेजी

शहद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है. इसमें काफी मात्रा में खनिज लवन पाये जाते हैं. यही कारण है कि कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए लोग शहद का सेवन कर रहे हैं. बाजार में शहद की मांग लगभग चार गुना बढ़ गई है. लेकिन कौन सा शहद असली है कौन सा नकली. इसकी पहचान मुश्किल हो गयी है, क्योंकि राज्य में शहद की गुणवत्ता जांचने के लिए अब तक कोई लैब नहीं है. शहद की प्रोसेसिंग करने वाले गिरीराज डालमिया बताते हैं कि मांग बढ़ने के कारण दर्जनों कंपनियों बाजार में आ गई हैं, लेकिन लोगों को शहद के नाम पर इंवर्ट कफ सिरफ पैक करके मिल रहा है. इससे ठीक होने के बजाए, लोग बीमार पड़ रहे हैं.

फुलवारीशरीफ के गोनपुरा में शहद का उत्पादन कर रहे परमेश कुमार बताते हैं कि बाजार में शहद की मांग के साथ कीमत बढ़ी है, पर उन्हें सही कीमत नहीं मिल पा रही है. इधर, मांग बढ़ने से शहद के रॉ मेटेरियल की मांग दोगुनी बढ़ गई है. पिछले साल शहद उत्पादकों से 82 रुपये किलो शहद खरीदा गया था, इस साल 145 रुपये खरीदा जा रहा है और बाजार में 400 से 500 रुपये किलो बिक रहा है. पर उत्पादकों को सही कीमत नहीं मिल पा रही है. बता दें कि राज्य में शहद की एक प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गई है. इसके अलावा सब शहद पश्चिम बंगाल, यूपी और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भेजा जाता है. वहां के व्यापारी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर अपने राज्य के नाम पर मार्केटिंग करते हैं. बता दें कि राज्य में 20 हजार टन शहद का उत्पादन होता है. इसमें पांच लाख मधुमक्खी की पेटी अभी ऑपरेशनल है.

मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और गया में सबसे अधिक होता है शहद

मुजफ्फरपुर और वैशाली में सबसे अधिक शहद का उत्पादन होता है. शहद उत्पादन में बिहार पहले स्थान पर है. राज्य में लीची से शहद का सबसे अधिक उत्पादन होता है. लीची का समय खत्म होते ही किसान मधु की पेटी को उठाकर झारखंड लेकर चले जाते हैं. वहां पर करंज से मधु का उत्पादन करते हैं. इसके अलावा समस्तीपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, औरंगाबाद, गया और पटना जिले में सरसों, सहजन और कटहल का शहद बनाया जा रहा है. अभी 30 प्रतिशत शहद का निर्यात किया जा रहा है. शहद की खासियत यह है कि एक बार पैकेजिंग हो जाने के बाद कई साल तक खराब नहीं होता है.

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स्वास्थ्य को होता है लाभ

शहद एक दिन में दो से तीन चम्मच लेने से फेफड़ा में संक्रमण कम होता है और ऑक्सीजन कम होने की समस्या को कम करता है अगर शहद के साथ नीबू लिया जाये तो विटामिन सी की पूर्ति होगी. इससे सांस से संबंधित समस्या दूर होती है.

शुद्ध शहद की पहचान करने के लिए पानी एक कारगार उपाय

एक कांच के गिलास में पानी लें और उसमें एक चम्मच शहद डालें. अगर शहद गिलास के नीचे जाकर जम जाता है यानी बैठ जाता है तो यह शुद्ध है और अगर यह पानी में घुल जाता है तो यह नकली है. ऐसा करने से आप तुरंत पता कर सकते हैं कि आपका शहद नकली है या असली. शहद का पानी में घुल जाने से आप जान सकते हैं कि आपके शहद में चीनी मिक्स है.

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