बिहार में सोलर बिजली का रास्ता साफ, मार्च 2023 से शुरू हो सकता है उत्पादन

Anurag Gupta1, Last updated: Mon, 8th Nov 2021, 10:20 AM IST
  • बिहार सोलर इलेक्ट्रिसिटी परियोजना को मंजूरी मिल गई है. इसमें दो कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है. इसके लिए बिहार रिन्यूअबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) की ओर से तीन साल से कोशिश की जा रही थी. हरी झंडी मिलने के बाद मार्च 2023 से चालू होने के कयास लगाए जा रहे हैं.
(फाइल फोटो)

पटना. लंबे समय से फाइलों में लटकी बिहार में 250 मेगावाट सोलर परियोजना का रास्ता साफ हो गया है. इस परियोजना में दो कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है. एजेंसियों का प्रस्ताव बिहार विद्युत विनियामक आयोग को भेज दिया गया है. आयोग से हरी झंडी मिलने के बाद बिहार में घर पर सोलर से बिजली पहुंचाने का काम शुरू किया जाएगा.

बिहार में अभी 180 मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन हो रहा है. जबकि नियम के अनुसार कुल खपत का 17 प्रतिशत गैर परम्परागत बिजली का होना जरूरी है. 250 मेगावाट की सोलर इकाई लगाने के लिए बिहार रिन्यूअबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) की ओर से तीन साल से कोशिश की जा रही थी. लेकिन हर बार नई एजेंसी आती और अधिक दर लगाने के कारण से रिजेक्ट हो जाती. कोई तकनीकी निविदा पास हो जाता तो वित्तीय निविदा में फेल हो जाता. इसी दौरान कोरोना ने अपना कहर बरपा दिया और कई बार इसका टेंडर बढाया गया. अब जाकर ब्रेडा को कामयाबी मिली.

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एसजेवीएम करेगी काम:

सोलर बिजली घर में 250 मेगावाट में से 200 मेगावाट का उत्पादन हिमाचल प्रदेश और केंद्र सरकार का संयुक्त उपक्रम एसजेवीएन करेगा. बक्सर के चौसा में 1320 मेगावाट की थर्मल इकाई पर यही एजेंसी काम कर रही है. एसजेवीएन ने मात्र 3.11 रूपए प्रति यूनिट सोलर बिजली देने का दर दिया है. एक निजी कंपनी अवादा पावर ने 100 मेगावाट सोलर बिजली घर लगाने का प्रस्ताव दिया है. इसमें 3.20 रूपए प्रति यूनिट का प्रस्ताव ब्रेडा को दिया है. ब्रेडा की कोशिश है कि अवादा पावर भी एसजेवीएन की तरह ही 3.11 रूपए प्रति यूनिट की दर से ही सोलर बिजली घर लगाए. हालांकि इस पर अंतिम फैसला विनियामक आयोग के स्तर पर ही होगा.

ब्रेडा निदेशक आलोक कुमार ने कहा कि ब्रेडा की ओर से यह ऐतिहासिक पहल है. इसके बाद भविष्य में और भी सोलर परियोजनाओं पर काम होगा.

प्लांट लगाने के लिए जमीन बनेगी समस्या:

एक मेगावाट लगाने के लिए कम से कम चार से पांच एकड़ जमीन की जरूरत होती है उस हिसाब से 250 लगाने के लिए 1000 से 1250 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी. जिसके कारण जमीन मिलने में परेशानी हो सकती है. जिसके चलते ब्रेडा ने कंपनियों से कहा है वो 50 मेगावाट का उत्पादन कर सकता है. जिसके लिए जमुई, गया, औरंगाबाद आदि इलाके में जमीन चिंहित की गई है.

काम शुरू करने के लिए 18 महीने में सोलर बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा. अनुमान लगाया जा रहा है इसके बाद मार्च 2023 से उत्पादन शुरू हो सकता है. विनियामक आयोग से अनुमति मिलने के बाद एजेंसियों को पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) का एक महीने का समय दिया जाएगा. इसके बाद कंपनियों को तय स्थानों पर काम करना होगा.

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