पटना के गांव में हुई ऐसी शादी जिसमें इंसान नहीं ये बने वर-वधु, पढ़ें

Smart News Team, Last updated: Mon, 21st Jun 2021, 11:59 AM IST
  • शनिवार को पटना के नजदीक एक गांव में एक अनोखी शादी रचाई गई. यह शादी गांव में मौजूद बरगद के एक पेड़ और कुएं के बीच हुई. इस विवाह को गांव वालों की उपस्थिति में पंडित ने पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया.
पटना के गांव में वट-वृक्ष और कुएं के बीच कराया गया विवाह (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पटना. पटना के नजदीक एक गांव से शनिवार को एक अनोखी शादी का मामला सामने आया है. यह शादी दो इंसानों के बीच नहीं हुई बल्कि इसमें गांव में लगे बरगद के पेड़ एवं एक कुएं को वर-वधु बनाया गया. दोनों वैदिक पद्धति से परिणय सूत्र में बंध गए है. इस अनोखे विवाह को आचार्य अनुज पांडेय ने पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया. इस विवाह में मटकोर से लेकर धृतधड़ी और सिंदूर दान सब कुछ पंचरत्न विवाह पद्धति के बीच कराया गया. शादी की पूरी रस्मों के साथ यह विवाह तीन घंटे में संपन्न हो गया.

धनरुआ प्रखंड के निमड़ा गांव में मानसून की पहली बारिश के बीच यह अनोखी शादी रचाई गई. जिसमें गांव के सैंकड़ों महिला-पुरुष शादी के गवाह बने. ग्रामीणों ने बताया कि इस शादी में वर पक्ष यानी वट-वृक्ष की ओर से प्रमोद कुमार और उनकी पत्नी ने सारी रस्में अदा की. वहीं कन्या पक्ष यानी कुएं की ओर से रामाधार सिंह एवं उनकी पत्नी ने धृतधड़ी की रस्में अदा की. रस्मों के बीच महिलाओं ने विवाह गीत भी गाए. वहीं विदाई की बेला में लोगों के आंसू भी छलक आए. विवाह के दौरान सिंदूरदान और विदाई के कुछ पलों में पूरा माहौल भक्तिमय हो गया.

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आचार्य अनुज पांडेय ने इस तरह की शादी की मान्यता के बारे में बताते हुए कहा कि इस प्रकार के विवाह का धार्मिक ग्रन्थों में संक्षेप में वर्णन है. जिसके तर्क की कसौटी पर कई तरह के मायने है. बरगद का पेड़ दीर्घ आयु वाला वृक्ष है और कुआं प्रकृति की पटरानी है. विवाहित महिलाएं बरगद के पेड़ के समक्ष पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती है. वहीं कुएं को इंद्र के सबसे करीब माना जाता है.

आचार्य के अनुसार इस शादी की मान्यता यह भी है कि जब तक बरगद के पेड़ की शादी नहीं होती और प्रकृति के दोनों पालनहार आपस में विवाह के बंधन में नहीं बंधते है, तब तक बरगद के पेड़ के समीप शादी के दौरान होने वाले पत्ते कटाई की रस्म अदा नहीं की जा सकती है. आचार्य ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक शादी है. इस शादी के संपन्न होने के बाद लोग लंबे समय तक इस वट-वृक्ष और कुएं का प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों में कर सकेंगे.

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