BJP दबाव, RJD विरोध, नीतीश 3C: 72 घंटे के शिक्षा मंत्री मेवालाल का इस्तीफा

Smart News Team, Last updated: 19/11/2020 05:57 PM IST
  • शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी के इस्तीफे में सीएम नीतीश कुमार के ट्रिपल सी फॉर्मूला - क्राइम, कम्युनलिज्म, करप्शन पर जीरो टॉलरेंस- का हवाला दे रहे लोग इस आरोप पर सीएम का बचाव नहीं कर पा रहे हैं कि सब कुछ जानते हुए मुख्यमंत्री ने इसी केस में जेडीयू से निलंबित मेवालाल को मंत्री बनाया कैसे और क्यों.
जेडीयू नेता मेवालाल चौधरी को 2017 में टीचर भर्ती घोटाला में नाम आऩे के बाद जेडीयू से निलंबित कर दिया गया था. 2020 के चुनाव में नीतीश ने दोबारा मेवालाल को तारापुर से टिकट दिया और जीतने के बाद राज्य का शिक्षा मंत्री बनाया था.

पटना. बिहार कृषि विश्वविद्यालय में टीचर भर्ती घोटाला के आरोपी और सीएम नीतीश कुमार की सरकार के नए शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने शपथ लेने के 72 घंटों और विभाग का चार्ज लेने के एक घंटे के अंदर कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुलाकात के दौरान मेवालाल से इस्तीफा मांग लिया था जिसे सीएम की अनुशंसा पर राज्यपाल फागू चौहान ने मंजूर कर लिया है. जेडीयू कोटे से मंत्री बने अशोक चौधरी को शिक्षा मंत्री का प्रभार दिया गया है.

16 नवंबर को 2 डिप्टी सीएम समेत 14 मंत्रियों के साथ सातवीं बार बिहार के सीएम बने नीतीश के चौथे कार्यकाल की शुरुआत में ही मेवालाल को मंत्री बनाना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था. तेजस्वी यादव लगातार ट्वीटर पर मेवालाल की आड़ में नीतीश कुमार के सुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर तंज कस रहे थे. पहले से ही जनादेश के अपहरण का आरोप लगाकर शपथ ग्रहण का बहिष्कार करने वाली आरजेडी के कार्यकर्ता मेवालाल के इस्तीफ के लिए सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे और नीतीश का पुतला जला रहे थे.

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बीजेपी भी सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव, प्रेम कुमार जैसे बड़े नेताओं को कैबिनेट से बाहर रखने के कड़े फैसले के बाद भ्रष्टाचार के आरोपी को मंत्री बनाने के आरोप से असहज हो रही थी. बीजेपी के किसी नेता ने खुलकर कुछ नहीं कहा लेकिन माना जा रहा है कि बीजेपी ने मेवालाल चौधरी को मंत्री बनाने की वजह से एनडीए सरकार की स्वच्छ छवि पर लग रही आंच की चिंता मुख्यमंत्री आवास को जाहिर कर दी. शिक्षकों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहे पूर्व वीसी मेवालाल को शिक्षा मंत्री बनाना सरकार और सरकार में शामिल पार्टियों की भ्रष्टाचार विरोधी राजनीति को कमजोर कर रहा था.

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मेवालाल की विदाई में हालांकि सीएम नीतीश कुमार के ट्रिपल सी फॉर्मूला - क्राइम, कम्युनलिज्म, करप्शन पर जीरो टॉलरेंस- का भी हवाला लोग दे रहे हैं लेकिन इस दलील में लोचा है कि नीतीश ने सब कुछ जानते हुए मेवालाल को अव्वल मंत्री बनाया ही कैसे और क्यों. टीचर भर्ती घोटाला केस में आरोपी बनने के बाद 2017 में विधायक रहे मेवालाल को जेडीयू से निलंबित किया गया था. तब सुशील मोदी मेवालाल की गिरफ्तारी के लिए लगातार बयान दे रहे थे और कह रहे थे कि सरकार जेडीयू विधायक को बचा रही है. नीतीश ने सब कुछ जानते हुए उनको टिकट दिया और जीतने के बाद अपने ही 3C फॉर्मूला को नजरअंदाज करके मंत्री बनाया.

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जेडीयू सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में जेडीयू के 8 मंत्री हार गए जिसमें दो कुशवाहा मंत्री थे- कृष्णनंदन वर्मा और रामसेवक सिंह. नीतीश को जीते हुए जदयू विधायकों में कुशवाहा समाज से मंत्री बनाना था और उसमें मेवालाल फिट हो गए जो पढ़े-लिखे नेता हैं. लेकिन भ्रष्टाचार का आरोप शपथ के साथ ही इतना बड़ा राजनीतिक बवंडर बन जाएगा, शायद ये अनुमान नीतीश को नहीं रहा होगा. कैबिनेट में कास्ट समीकरण को फिट करने की कोशिश में नीतीश ने मेवालाल नाम का बम विपक्ष के हाथ में थमा दिया.

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शासनादेश से जनादेश बदलने वाला और नीतीश को मनोनीत मुख्यमंत्री कहकर लगातार एनडीए को चिढ़ा रहे राष्ट्रीय जनता दल को सरकार के पहले ही दिन अपनी क्लीन इमेज को लेकर संजीदा नीतीश के खिलाफ हमला बोलने का मौका मिल गया. तेजस्वी यादव ने कहा- "भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में भगोड़े आरोपी को शिक्षा मंत्री बना दिया. अल्पसंख्यक समुदायों में से किसी को भी मंत्री नहीं बनाया. सत्ता संरक्षित अपराधियों की मौज है. रिकॉर्डतोड़ अपराध की बहार है. कुर्सी ख़ातिर Crime, Corruption और Communalism पर मुख्यमंत्री जी प्रवचन जारी रखेंगे."

और अब जब मेवालाल के इस्तीफे में तेजस्वी यादव और महागठबंधन को पहली जीत मिली है तो तेजस्वी ने नीतीश पर हमला और तीखा कर दिया है. तेजस्वी ने ट्वीट किया- "मैंने कहा था ना आप थक चुके हैं इसलिए आपकी सोचने-समझने की शक्ति क्षीण हो चुकी है. जान-बूझकर भ्रष्टाचारी को मंत्री बनाया, थू-थू के बावजूद पदभार ग्रहण कराया, घंटे बाद इस्तीफ़े का नाटक रचाया. असली गुनाहगार आप है. आपने मंत्री क्यों बनाया? आपका दोहरापन और नौटंकी अब चलने नहीं दी जाएगी?"

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नीतीश सरकार राजभवन से शपथ लेने के बाद अभी विधानसभा भी नहीं पहुंच पाई है कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक सफलता हाथ लग गई है. 23 नवंबर से विधानसभा का सत्र है जिसमें नए सदस्यों का शपथ और स्पीकर का चुनाव होना है. विपक्ष ने दावा नहीं किया है इसलिए सदन के एजेंडा में विश्वास मत, बहस या बहुमत परीक्षण नहीं है. लेकिन तेजस्वी यादव विधानसभा के पहले सत्र में भी बोलने का हर मौका मेवालाल के कंधे से नीतीश पर फायर करने और नौकरी- रोजगार के वादे याद दिलाने में करेंगे.

विधानसभा सत्र से पहले तेजस्वी का ये ट्वीट आरजेडी की रणनीति का इजहार भी करता है- "माननीय मुख्यमंत्री जी, जनादेश के माध्यम से बिहार ने हमें एक आदेश दिया है कि आपकी भ्रष्ट नीति, नीयत और नियम के खिलाफ आपको आगाह करते रहें. महज एक इस्तीफे से बात नहीं बनेगी. अभी तो 19 लाख नौकरी, संविदा और समान काम- समान वेतन जैसे अनेकों जन सरोकार के मुद्दों पर मिलेंगे. जय बिहार, जय हिन्द."

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तेजस्वी के हमले के जवाब में नीतीश की कैबिनेट में इस बार सुशील मोदी वाले विभाग संभाल रहे डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद चुप हैं. दूसरी डिप्टी सीएम रेणु देवी ने बस इतना कहा है कि आरोप लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता. तेवर वाला साथ एक बार फिर मिला है बीजेपी के सुशील मोदी का, जिन्हें बतौर डिप्टी सीएम मिस करने की बात नीतीश खुलकर कह चुके हैं. 

तेजस्वी का बही-खाता निकाल-निकालकर हमला करने वाले पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने एक बार फिर नीतीश के बचाव में मोर्चा लेते हुए तेजस्वी पर आक्रामक हमला किया है. सुशील मोदी ने ट्वीट किया- "तेजस्वी यादव को भी इस्तीफ़ा देना चाहिये क्योंकि वो भ्रष्टाचार से जुड़े IRCTC घोटाले में न केवल चार्जशीटेड बल्कि ज़मानत पर हैं. कोविड के कारण ट्रायल रुका हुआ था. किसी भी दिन ट्रायल शुरू हो सकता है."

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