प्रशांत किशोर के बंगाल BJP डबल डिजिट ट्वीट पर JDU की चुटकी- रिटायरमेंट टाइम

Smart News Team, Last updated: Tue, 22nd Dec 2020, 12:34 AM IST
प्रशांत किशोर के ट्वीट के बाद जदयू और भाजपा ने कहा है कि अब उन्हें रिटायरमेंट ले लेना चाहिए और अपने जीवन की बेहतर योजना बनाने की कोशिश करनी चाहिए. दरअसल, प्रशांत ने ट्वीट करके कहा था कि इस साल पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा डबल डिजिट के लिए भी संघर्ष करेगी. यदि ऐसा होता है तो वे चुनावी रणनीति का काम छोड़ देंगे.
प्रशांत किशोर के ट्वीट के बाद भाजपा और जदयू ने उन्हें रिटायरमेंट की सलाह दी है.

पटना. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के ट्वीट पर जदयू और भाजपा ने उनको सलाह दी है कि वे रिटायरमेंट की योजना बनाना शुरू कर दें. दरअसल, प्रशांत ने ट्वीट किया कि अगर अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने दोहरे अंक को पार कर लिया तो वे अपना चुनाव रणनीतिकार का कार्य छोड़ देंगे. 

प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि सहयोगी मीडिया के एक वर्ग द्वारा सभी प्रचार के लिए, वास्तव में BJP डबल डिजिट के लिए संघर्ष करेगी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कृपया इस ट्वीट को सहेजें और यदि भाजपा कोई बेहतर काम करती है तो मुझे यह स्थान छोड़ना होगा.

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इसके बाद जदयू के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि आपके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा. भाजपा, जदयू, कांग्रेस और द्रमुक ने पहले ही आपको भगा दिया है. हार के बाद ममता दी भी आपको गुलदस्ते नहीं देंगी. इसलिए बेहतर होगा कि आप रिटायरमेंट की घोषणा करें और अपने जीवन की योजना बनाएं.

भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि बंगाल में भाजपा सरकार बनाने से कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर को पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ बयान जारी करने के बदले एक राजनीतिक दलाल के रूप में अपना भविष्य सोचना चाहिए.

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आपको बता दें कि नीतीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर के अच्छे संबंध थे लेकिन इस साल फरवरी में नागरिकता कानून के खिलाफ उनके रुख और नीतिश कुमार पर लगातार हमले के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. प्रशांत किशोर ने नागरिकता कानून को लेकर कहा था कि नागरिकता कानून प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के साथ मिलकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को परेशान करने की क्षमता रखता है.

आपको बता दें कि प्रशांत ने विधानसभा चुनावों के लिए लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और जदयू के बीच गठबंधन में अहम भूमिका निभाई और 2015 में बिहार में बीजेपी को हराया. परिणाम के बाद उन्होंने कहा था कि वह बिहार पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं और अगले 10 से 15 वर्षों तक राज्य में बने रहना चाहते हैं.जदयू के साथ अलग होने के बाद उन्हें टीएमसी द्वारा बंगाल में अपनी रणनीति की योजना बनाने के लिए संपर्क किया गया था.

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