Kalashtmi 2021: पौष माह की कालाष्टमी 27 दिसंबर को मनाई जाएगी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Anurag Gupta1, Last updated: Sat, 25th Dec 2021, 1:01 PM IST
  • 27 दिसंबर को कलाष्टमी मनाई जाएगी. काल भैरव की पूजा हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन की जाती है. कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त अष्टमी की तिथि 26 दिसंबर को रात्रि 08 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी. जो कि 27 दिसंबर को शाम 07 बजकर 28 मिनट पर समाप्त हो रही है.
कालाष्टमी की पूजा 27 दिसंबर को होगी (फाइल फोटो)

काल भैरव भगवान शिव का रुद्र रूप की पूजा हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन करने का विधान है. हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और व्रत आदि किया जाता है. इस दिन कई तरह की उपाय कर भगवान काल भैरव को प्रसन्न किया जाता है. पौष माह की अष्टमी तिथि 27 दिसंबर, सोमवार को है. इसे कालाष्टमी या भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है.

भय, संकट को दूर करने राजकोप व लांछन से बचने के लिए श्रध्दालु काल भैरव अष्ठमी का व्रत रखते हैं. इस दिन भैरव की सबसे की सबसे विशिष्ट पूजा की जाती है. आचार्य माधवानंद कहते हैं कि काल भैरव को रूद्रावतार माना जाता है. भैरव को शिव द्वारपाल बी कहा जाता है.

क्या है मान्यता:

जब भगवान शंकर का अपमान हुआ था, तब सती ने यज्ञ कुंड में कूद कर देह का दहन कर लिया था. इससे कुपित भगवान ने भैरव को यज्ञ ध्वंस के लिए भेजा था. साक्षात काल बनकर भैरव ने तांडव किया था. जानकार बताते है कि काल भैरव की महत्ता इससे ही पता लगाई जा सकती है कि जहां-जहां ज्योर्तिंलिंग और शक्तिपीठ हैं. वहां-वहां काल भैरव को स्थान मिला है.

क्या है शुभ मुहूर्त:

अष्टमी की तिथि 26 दिसंबर को रात्रि 08 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी और 27 दिसंबर को शाम 07 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि और प्रदोष काल 27 दिसंबर को पड़ने के कारण अष्टमी तिथि इसी दिन मान्य होगी. 

पूजा विधि:

अष्टमी तिथि को प्रातः स्नानादि करने के पश्चात व्रत का संकल्प लें.

भगवान शिव के समक्ष दीपक जलाएं और पूजन करें.

कालभैरव भगवान का पूजन रात्रि में करने का विधान है.

अब फूल, इमरती, जलेबी, उड़द, पान नारियल आदि चीजें अर्पित करें.

शाम को किसी मंदिर में जाएं और भगवान भैरव की प्रतिमा के सामने चौमुखा दीपक जलाएं.

इसके बाद वहीं आसन पर बैठकर कालभैरव भगवान का चालीसा पढ़ना चाहिए.

पूजन पूर्ण होने के बाद आरती करें और जानें-अनजाने हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे.

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