मधुबनी में नॉलेज फर्स्ट एकेडमी ने कराई मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिता, विवेक ने किया टॉप

Swati Gautam, Last updated: Sat, 6th Nov 2021, 4:03 PM IST
  • बिहार के मधुबनी के शुभंकरपुर में रविवार को नॉलेज फर्स्ट एकेडमी ने मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें पहला स्थान विवेक कुमार ने हासिल किया. रूपम कुमारी ने दूसरा और आरती कुमारी ने तीसरा स्थान हासिल किया. इन तीनों विजेताओं को शील्ड, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
मधुबनी में नॉलेज फर्स्ट एकेडमी ने कराई मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिता, विवेक ने किया टॉप

पटना. बिहार के मधुबनी के शुभंकरपुर में रविवार को नॉलेज फर्स्ट एकेडमी ने मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया. आयोजित इस प्रतियोगिता में सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. मिथिला पेंटिंग की इस प्रतियोगिता में पहला स्थान विवेक कुमार ने हासिल किया है. वहीं, रूपम कुमारी को दूसरा जबकि आरती कुमारी को तीसरा स्थान मिला. इन तीनों विजेताओं को शील्ड, प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. इसके साथ-साथ प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद पुरस्कार भी दिया गया. इतना ही नहीं टॉप दस प्रतिभागियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र दिया गया और हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिया गया.

आयोजित प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधान परिषद के सदस्य घनश्याम ठाकुर मौजूद रहे. उन्होंने प्रतियोगिता खत्म होने पर कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन समय समय पर होते रहना चाहिए. मिथिला पेंटिंग की महत्ता दुनियाभर में है और इस तरह की लोककला गौरवशाली मैथिल संस्कृति का एहसास कराती हैं. उन्होंने आगे कहा कि लोककलाओं को जीवंत बनाने के मकसद से किया गया नॉलेज फर्स्ट का यह प्रयास काबिलेतारीफ है. वहीं, कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डॉ कमलकांत झा ने कहा कि ऐतिहासिक मिथिला की हर बात निराली है. बच्चों को ऐतिहासिक तथ्यों और परंपराओं का ज्ञान होना ज़रूरी है.

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बता दें कि नॉलेज फर्स्ट एक ऐसी एकेडमी है जिसकी शुरुआत ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को स्थानीय इलाकों में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के मकसद से की गई है. इस संस्था के डायरेक्टर सुधीर झा हैं उन्होंने मिथिला पेंटिंग प्रतियोगिता को लेकर कहा कि उनका मकसद प्रतिभाओं के पलायन को रोकना है और वह इसके लिए बड़े-बड़े शहरों कि शिक्षकों को इस प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के आयोजनों से हमारे गौरवपूर्ण धरोहरों का संरक्षण होता है.

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