पटना

दोहरी मार: ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी, इमरजेंसी मरीजों को भी नहीं मिल रहा

Shankar Pandit, Last updated: 31/05/2020 03:03 PM IST
  • कोरोना वायरस संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है। मगर पटना के लोग कोरोना के खतरे से तो जूझ ही रहे हैं, मगर अब खून की कमी से भी दो-चार हो रहे हैं। कोरोना संकट के कारण पटना के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी हो गई है।
Blood Bank File Photo

कोरोना वायरस संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है। मगर पटना के लोग कोरोना के खतरे से तो जूझ ही रहे हैं, मगर अब खून की कमी से भी दो-चार हो रहे हैं। कोरोना संकट के कारण पटना के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी हो गई है। इस कारण इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को भी खून नहीं मिल पा रहे हैं। पीएमसीएच में तो खून की कमी के कारण पिछले दिनों कई ऑपरेशन भी टालने तक की नौबत आ गई थी।

सर्जरी वार्ड में भर्ती 12 वर्षीय आनंद कुमार का ऑपरेशन खून की कमी के कारण दो दिनों तक टालना पड़ा। उसके बाद उसके रिश्तेदार आए तो खून दिए तब बदले में उसे ब्लड बैंक से खून मिला। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि पीएमसीएच में खून की काफी कमी है। कुछ रिजर्व खून थैलीसीमिया, एड्स अथवा गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के लिए रहता है।

ऐसी ही खून की कमी से एम्स, आईजीआईएमएस के ब्लड बैंकों के अलावा रेड क्रॉस और जयप्रभा ब्लड बैंक भी जूझ रहे हैं। सभी ब्लड बैंकों की पड़ताल करने पर ज्ञात हुआ कि कोरोना लॉक डाउन और कोरोना संक्रमण का भय इन ब्लड बैंकों के भंडार पर भारी पड़ रहा है।

पीएमसीएच का हाल

पीएमसीएच में जहां लॉक डाउन से पहले एक हजार यूनिट से ज्यादा ब्लड प्रतदिनि रहता था, वहीं अब यह घटकर 220 से 250 यूनिट तक रह गई है। पीएमसीएच ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि लॉक डाउन और कोरोना संकट के कारण पिछले दो महीने से एक भी ब्लड डोनेशन कैंप नहीं लगा है। इस कारण ब्लड बैंक में खून की काफी कमी हो गई है। बताया कि यहां 1000 यूनिट से ज्यादा खून रखने की क्षमता है। अभी 250 यूनिट में ज्यादातर बी पॉजिटिव खून ही है। अन्य ग्रुप खासकर निगेटिव ग्रुप की खून की भारी कमी है। इससे सबसे ज्यादा संकट इमरजेंसी में ऑपरेशन करानेवाले मरीजों को हो रही है।

आईजीआईएमएस का हाल

आईजीआईएमएस का ब्लड बैंक तो पहले से ही खून की कमी झेल रहा है। कोरोनाके कारण यह संकट और अधिक बढ़ गया है। दूसरे यहां के ब्लड बैंक में खून है कि नहीं, यह जानकारी यदि कोई मरीज का परिजन लेना भी चाहता है तो जल्दी नहीं दी जाती है। यहां के भर्ती मरीजों को खून की जरूरत के लिए या तो परिजनों के रक्तदान पर अथवा अन्य अस्पतालों के ब्लड बैंकों पर आश्रित रहना पड़ता है। यहां भर्ती मरीजों का ऑपरेशन तभी हो पाता है जब उसके परिजन स्वयं खून की व्यवस्था कर लेते हैं। इसके लिए परिजनों को रक्दान करना पड़ता है।

रेडक्रॉस, गांधी मैदान का हाल

रेडक्रॉस में अभी 40 से 50 यूनिट खून बचा है। 15-20 दिन पहले तो यहां आठ से 10 यूनिट ही खून बचा था। रेडक्रॉस सोसाइटी पटना का एक महत्वपूर्ण ब्लड बैंक है। यहां से जरूरतमंद मरीजों को खून आसानी से मिल जाता था। लेकिन अब उपलब्धता कम होने के कारण यहां से भी खून मिलने में परेशानी हो रही है। रेडक्रॉस के अध्यक्ष डॉ. बीबी सिन्हा ने कहा कि पटना में अभी भी ब्लड डोनेशन कैंप बहुत कम लग रहा है। बाहर के जिले से रक्दान करनेवालों से खून लाकर यहां की व्यवस्था चलाई जा रही है। इस ब्लड बैंक की क्षमता 900 यूनिट खून संग्रहण करने की है। पहले हमेशा 700 से 800 यूनिट यहां रिजर्व रहता था। पीएमसीच, आईजीआईएमएस और अन्य जगहों पर भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर नि:शुल्क खून यहां से दिया जाता था।

पटना एम्स का हाल

राज्य का सबसे बड़ा ब्लड बैंक पटना एम्स में है। इसकी क्षमता तीन हजार लीटर यानी लगभग 7500 यूनिट है। अभी यहां 250 यूनिट के लगभग खून बचा है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नेहा सिंह ने बताया कि लॉक डाउन के कारण अभी खून की मांग भी कम है। प्रतिदिन 25 से 30 यूनिट की मांग होती है। लॉक डाउन में छूट के बाद भी अभी 15-20 यूनिट ही प्रतिदिन ब्लड रक्तदान से मिल पा रहा है। खून की मांग बढ़ेगी तो काफी मुश्किल होगी। बताया कि पहले प्रत्येक सप्ताह 100 से 200 यूनिट खून ब्लड बैंक को डोनेशन से मिलता था।

जय प्रभा ब्लड बैंक का हाल

जयप्रभा भी शहर के पुराने और प्रतिष्ठित ब्लड बैंकों में से एक है। लेकिन लॉक डाउन के कारण यहां भी खून की भारी कमी हो गई है। लोगों को जरूरत के समय खून नहीं मिल पाता है। कंकड़बाग के एक अस्पताल में भर्ती राकेश सिंह के परिजनों को गुरुवार को यहां से खून नहीं मिल पाया था। इसके बाद उनके एक करीबी ने एक निजी ब्लड बैंक से खून देकर खून लिया। इसके बाद उनके मरीज का इलाज होसका।

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