पटना

महासंकट: पटना में मार्बल-ग्रेनाइट व एक्सपर्ट मिस्त्री की किल्लत झेल रहे कारोबारी

Smart News Team, Last updated: 04/06/2020 02:27 PM IST
  • कारोबारियों की समस्या का आलम तो यह है कि ना तो शहर में मार्बल, ग्रेनाइट और टाइल्स की आपूर्ति ही आसानी से हो सकी है और ना ही इन पत्थरों को लगाने के लिए कुशल मिस्त्री और मजदूरों ही काम पर लौट सके हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना वायरस संकट की वजह से शहरों से गांवों की ओर जमकर पलायन हुआ है। लंबे समय तक के लॉकडाउन ने कामगारों, मजदूरों और प्रवासियों को अपने घर जाने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, अब लॉकडाउन में छूट और अनलॉक वन के ऐलान के बाद अब कामकाज शुरू हो गए हैं। शहरों में अनलॉक एक में छूट के बावजूद शहर के मार्बल और ग्रेनाइट कारोबारियों की समस्या कम नहीं हो रही हैं। इन कारोबारियों की समस्या का आलम तो यह है कि ना तो शहर में मार्बल, ग्रेनाइट और टाइल्स की आपूर्ति ही आसानी से हो सकी है और ना ही इन पत्थरों को लगाने के लिए कुशल मिस्त्री और मजदूरों ही काम पर लौट सके हैं।

दरअसल, पटना में हर दिन करीब 25 हजार वर्गफीट मार्बल और ग्रेनाइट आदि की खपत होती है। राजस्थान से राजधानी में औसतन हर दिन करीब 20 गाड़ियां मार्बल आदि लेकर आते रहे हैं। मगर कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से बीते तीन महीने से पटना में मार्बल और ग्रेनाइट कारोबार को बड़ा झटका लगा है। कारोबारी कारीगरों के साथ-साथ मार्बल और ग्रेनाइट की सप्लाई का भी इंतजार कर रहे हैं।

पटना टाइल्स एंड ग्रेनाइट टेंडर कल्याण समिति के अध्यक्ष बिनोद कुमार पाठक ने कहा, 'यहां राजस्थान और दक्षिणी राज्यों से मार्बल और ग्रेनाइट की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हो चुकी है। कारोबार पूरी तरह से मंदा हो गया है। इसकी वजह से मार्बल-ग्रेनाइट कारोबारियों को अब तक दस करोड़ से ज्यादा का कारोबार अब तक प्रभावित हो चुका है। बीस करोड़ से अधिक की पूंजी बजार में फंस चुकी है।

कारोबार ठप होने से कारोबारियों पर कर्ज: पटना शहर में लगभग तीन सौ मार्बल, ग्रेनाइट के कारोबारी हैं। दुकानें बंद होने के बावजूद कारोबारियों को बिजली का फिक्सड जार्च और अपने कर्मचारियों के वेतन का बोझ उठाना पड़ रहा है। बाजार में फंसी पूंजी की निकासी कब तक हो सकेगी इस बारे में उद्यमियों को भी नहीं पता है। वे सरकार से सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लाखों रुपये का कर्ज कारोबारियों के सिर पर गिर चुका है। दुकान नहीं खुलने और कारोबार मंदा रहने के बावजूद कारोबारियों को - बैंक का ईएमआई, कर्ज का ब्याज, गोदाम और दुकान का किराया आदि चुकाना पड़ रहा है।

लॉकडाउन की वजह से पटना नहीं पहुंच रहा माल: राजस्थान और गुजरात का मार्बल और दक्षिण के राज्यों से ग्रेनाइट की आपूर्ति पटना शहर में बीते तीन महीने से बाधित है। मार्बल व्यवसायी दीपक कमार कहते हैं कि होली के एक सप्ताह पहले से ही माल की आपूर्ति का क्रम टूटने लगा था। होली के बाद कोरोना के कारण अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका है। दक्षिण के राज्यों तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि राज्यों से व्यापारी जाकर ग्रेनाइट लेकर आते रहे हैं। लेकिन अब तक आवागमन के साधन सुगम नहीं होने से ग्रेनाइट की आपूर्ति बाधित है। जबकि राजस्थान और गुजरात से मार्बल की आपूर्ति होती थी। लेकिन राजस्थान से बिहारी मजदूरों के पलायन के बाद वहां माल के लोडिंग की समस्या खड़ी हो गई है। सिरामिक टाइल्स का प्लांट राजकोट में मजदूरों के कारण बंद हो गया है। मार्बल और ग्रेनाइट की आपूर्ति 60 प्रतिशत से ज्यादा बाधित है।

एक्सपर्ट मिस्त्री किल्लत से जूझ रहे बिजनेसमैन: मार्बल व ग्रेनाइट व्यवसायी बताते हैं कि इसके अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले मार्बल और ग्रेनाइट को लगाने वाले एक्सपर्ट मिस्त्री भी लौटकर काम पर नहीं आ सके हैं। राज्य के अन्य हिस्सों में रहने वाले कुशल मिस्त्री और कारीगर भी अब तक काम पर नहीं लौटे हैं। मार्बल और ग्रेनाइट ढोने वाले ट्रांसपोर्टरों के ड्राइवर और खलासी भी काम पर नहीं आए है। इसके कारण भी व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कुल मिलाकर राजधानी में मार्बल, गे्रनाइट और टाइल्स के उद्यमियों को भारी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है।

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