पटना

नम आंखें, फहरता तिरंगा, जयकार... शहीद सुनील की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

Smart News Team, Last updated: 18/06/2020 04:10 PM IST
  • बिहटा के शहीद सुनील कुमार को गुरुवार को अंतिम विदाई दी गई, जिसमें उन्हें श्रद्धांजलि देने और विदाई सलामी देने के लिए हल्दी छपड़ा के घाट पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।
शहीद सुनील कुमार की शवयात्रा में उमड़ा जनसैलाब

चीन के साथ लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए, जिनमें पटना के बिहटा के सबूत सुनील कुमार भी शामिल थे। शहीद सुनील कुमार आज राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। बिहटा के शहीद सुनील कुमार को गुरुवार को अंतिम विदाई दी गई, जिसमें उन्हें श्रद्धांजलि देने और विदाई सलामी देने के लिए हल्दी छपड़ा के घाट पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। बता दें कि बुधवार की शाम में हवाई जहाज से शहीद सुनील के पार्थिव शरीर को पटना लाया गया था, जहां उन्हें बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने पुष्प अर्पित की और सलामी दी।

आज सुबह हल्दी छपरा घाट पर सेना, प्रशासनिक अधिकारियों और भारी जनसमूह की मौजूदगी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद सुनील कुमार का अंतिम संस्कार हुआ। इससे पहले शहीद सुनील कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार की सुबह दानापुर छावनी से पैतृक गांव बिहटा के तारानगर ले जाया गया। वहां से फिर हल्दी छपरा घाट के लिए शव यात्रा निकाली गई। शव यात्रा के दौरान शहीद सुनील के अंतिम दर्शन करने के लिए पूरा गांव ही उमड़ पड़ा। हालांकि, इस बीच शहीद जवान सुनील की पत्नी, मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।

राजकीय सम्मान के साथ दी गई शहीद सुनील को अंतिम विदाई

बता दें कि सुनील कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार की सुबह उनके घर सिकरिया के तारापुर गांव पहुंचा। जैस ही शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, पूरा गांव शहीद सुनील कुमार अमर रहें और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। शहीद सुनील के माता-पिता, पत्नी और परिजन जरूर रो रहे थे, मगर उन्हें गर्व था कि उनका बेटा देश की रक्षा की खातिर शहीद हुआ है। शहीद के परिवार वालों के आंखों में आंसू जरूर थे मगर सीना चौड़ा था क्योंकि उनके सपूत ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

शहीद सुनील के पिता वासुदेव ने सरकार के सवाल किया है कि आखिर उनकी बेटे की मौत का बदला कब लेगी सरकार। पिता के भीतर बेटे के जाने का गम जरूर था मगर गर्व के साथ-साथ गुस्सा भी था। इसके अलावा, उनके गांव वालों को भी शहीद सुनील की शहादत पर नाज है। बता दें कि सोमवार की देर रात चीन के साथ झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। बताया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर 16 बिहार रेजिमेंट के जवान थे। सभी शहीदों में 5 बिहार के अलग-अलग जिलों के थे।

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