हजारों वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र, बोधगया-काशी से दक्षिण में होता था व्यापार, ASI ने दी खुदाई की मंजूरी

Sumit Rajak, Last updated: Sat, 26th Feb 2022, 9:01 AM IST
  • भभुआ (कैमूर) के नींद और पुरास्थल से 4000 वर्ष पुरानी नगर का साक्ष्य मिले है. व्यापार के सिलसिले में इस मार्ग से गुजरते समय इस प्राचीन नगर में व्यापारी ठहरते थे. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में बीएचयू की टीम को यहां खुदाई की अनुमति दी.
फाइल फोटो

पटना. हजारों वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र, बोधगया एवं काशी होते हुए दक्षिण में व्यापार होता था. इसके साथ भभुआ (कैमूर ) के नींदौर पूरास्थल के सर्वेक्षण में मिला है. यहां एक बड़ा टीला (नगर) मिला है. व्यापारी एवं धार्मिक यात्री इसका उपयोग इस रास्ते से गुजरने के दौरान ठहरने के लिए करते थे. लगभग 200 साल पहले अंग्रेज इतिहासकार बुकानन में भी अपने शोध में कार्य से पाटलिपुत्र होते हुए व्यापारिक मार्ग का जिक्र किया है.

संस्कृत मंत्रालय के अधीन आने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग को इस स्थल की खुदाई की अनुमति दी है. बीएचयू की टीम ने डॉक्टर विकास कुमार सिंह के निर्देशक एवं प्रोफेसर रविंद्र नाथ सिंह ने के मार्गदर्शन में शुक्रवार को इस स्थल का उत्खनन के लिए निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान अनुमानतः 4 हजार साल पुराना टीला मिला. यह शुंग-कुषाण काल की ईंटों से बनी दीवार भी मिली है. शुक्रवार को सर्वेक्षण में वलय कूप (प्राचीन सौखता), मृदभांड, पशु मृणमूर्ति के साथ लोहे एवं शीशे के स्लैग भी मिले हैं. 28 फरवरी से यहां विधिवत उत्खनन प्रारंभ किया जायेगा. इस पूरा स्थल के उत्खनन से कई नए तथ्य सामने आए आएंगे.

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खुदाई करने वाली टीम में यह है शामिल 

इस खुदाई में अरुण पांडे, डॉक्टर धीरेंद्र प्रताप सिंह , डॉक्टर सुदर्शन चक्रधारी, डॉ. बृजमोहन, डॉ. आफताब आलम, अभय प्रताप सिंह, उर्वशी सिंह एवं अनीशा सिंह शामिल है.

 

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