पटना: राज्य के सभी जूनियर डॉक्टर्स आज से हड़ताल पर AIIMS और IGIMS खुलेगा

Smart News Team, Last updated: Wed, 23rd Dec 2020, 1:47 PM IST
  • जूनियर डॉक्टर प्रत्येक साल 10% स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग और प्रधान सचिव से नहीं मिल पाने का आरोप लगाते हुए हड़ताल पर गए हैं. IGIMS और AIIMS का कोई भी डॉक्टर हड़ताल पर नहीं है. वह अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
पटना: राज्य के सभी जूनियर डॉक्टर्स आज से हड़ताल पर AIIMS और IGIMS खुलेगा

पटना: बिहार में आज से जूनियर डॉक्टर मरीजों को नहीं देखेंगे और ना ही हॉस्पिटल में अपनी ड्यूटी देंगे. जूनियर डॉक्टरों की स्ट्राइक की वजह से बिहार में आज से स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने की उम्मीद है. Junior doctors की भूमिका स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बेहद महत्वपूर्ण है. लगातार सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर ही बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं और अब इन्होंने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है. राज्य भर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं. IGIMS और AIIMS का कोई भी डॉक्टर हड़ताल पर नहीं है. PMCH में जूनियर डॉक्टर के हड़ताल के कारण अभी OPD में इलाज प्रभावित है.

सुबह कुछ देर मरीजों का पंजीकरण हुआ था. लेकिन अभी बंद है.10:30 बजे PMCH के प्राचार्य और अधीक्षक जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बात करेंगे. उनका कहना है कि जब भी प्रधान सचिव से मिलने जाते हैं. वह मिलने से इनकार कर देते हैं हमारी कोई बात नहीं सुनता है. जूनियर डॉक्टर प्रत्येक साल 10% स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग और प्रधान सचिव से नहीं मिल पाने का आरोप लगाते हुए हड़ताल पर गए हैं.

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Junior डॉक्टरों की 1 सूत्री मांग स्टाइपेंड(वृत्तिका) बढ़ाने की है. आज सुबह 7:00 बजे से सभी जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. जूनियर डॉक्टर्स एसोसिऐशन JDA ने मंगलवार को ही इसका ऐलान कर दिया था. JDA के मुताबिक उन्होंने अपनी तरफ से मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और अधीक्षक को जानकारी दे दी है. JDA के मुताबिक साल 2017 से BIHAR में जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड रिवाइज नहीं किया गया है जिसकी वजह से वह हड़ताल पर जा रहे हैं.

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JDA के अध्यक्ष डॉक्टर हरेंद्र के मुताबिक राज्य में जूनियर डॉक्टरों की संख्या तकरीबन 1000 है. यानी कुल डॉक्टरों की संख्या से आधी तादाद जूनियर डॉक्टरों की है. जो PG से लेकर इमरजेंसी सेवा तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने इस मामले पर दो बार राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से मिलने का प्रयास किया, लेकिन मुलाकात नहीं हुई. विभाग का कहना है कि प्रथम वर्ष में 50 हजार और द्वितीय वर्ष में 55-55 हजार मिलता है.

 

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