डेंगू का केंद्र बना पटना, रोज मिल रहे इतने केस, अभी और बढ़ेगा खतरा

Smart News Team, Last updated: Thu, 5th Aug 2021, 7:21 PM IST
  • पटना में एक बार फिर डेंगू ने दस्तक दे दी है. पटना के अस्पतालों में रोजाना डेंगू के एक-दो मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. आईजीआईएमएस के डॉ. मनोज चौधरी का कहना है कि डेंगू अगले कुछ दिनों में क्षेत्र में अपने पैर पसार सकता है और ऐसे में नगर निगम डेंगू को लेकर सावधानी नहीं बरत रहा है.
पटना में डेंगू ने एक बार फिर दी दस्तक (प्रतीकात्मक फोटो)

 पटना. बिहार की राजधानी पटना में डेंगू के मामले एक बार फिर आने शुरु हो गए हैं. राजधानी के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में अब डेंगू से पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं. इस बार शास्त्रीनगर, दीघा पोस्ट ऑफिस रोड, गर्दनीबाग, रामनगरी के साथ-साथ जवाहरनगर और सरिस्ताबाद जैसे इलाकों से भी एक आद मरीज अस्पतालों और निजी क्लिनिकों में इलाज के लिए जा रहे हैं. जबकि इनके साथ ही पिछले साल डेंगू के केंद्र रहे ट्रांसपोर्टनगर, आरएमएस कॉलोनी, चीना कोठी, चित्रगुप्तनगर और मंदिरी से भी डेंगू के मामले आ रहे हैं. राजधानी पटना में  कोरोना के साथ-साथ डेंगू के मामले बढ़ने से लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

वहीं आईजीआईएमएस और पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भी  रोजाना डेंगू के एक-दो मरीज आ रहे हैं. आईजीआईएमएस के डॉ. मनोज चौधरी का कहना है कि डेंगू अगले कुछ दिनों में क्षेत्र में अपने पैर पसार सकता है. इससे मरीजों की संख्या बढ़ सकती है. मनोज चौधरी ने कहा कि डेंगू के मामलों में 15 अगस्त के बाद से तेजी आ सकती है. उन्होंने कहा कि डेंगू के केंद्र रहे इलाकों में हालांकि जलजमाव कम है लेकिन गंदगी होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है. डॉक्टर मनोज ने बीते पांच साल के डाटा का हवाला देते हुए बताया कि पटना शहर में सितंबर से नवंबर के बीच डेंगू के मामलों में तेजी आती है.

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ऐसे में स्थिति से रुबरु होते हुए भी मच्छरों को बढ़ने से रोकने के लिए नगर निगम और मलेरिया विभाग की ओर से कुछ खास कार्रवाई होती नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि कुछ मुहल्लों में कभी-कभी फॉगिंग वाहन दिखता है वह भी जल्दबाजी में धुंआ छोड़ता हुआ निकल जाता है. वहीं पिछले साल डेंगू के केंद्र रहे और जलजमाव से प्रभावित इलाकों में डेंगू को लेकर सावधानी नहीं बरती जा रही है. 

ट्रांसपोर्टनगर, चित्रगुप्तनगर, रामलखनपथ, राजेंद्रनगर, सरिस्ताबाद, दीघा, शास्त्रीनगर पिछले साल डेंगू के केंद्र रहे थे. इन इलाकों में बारिश होने से जलजमाव भी हो जाता है. इसके बावजूद नगर निगम की ओर से मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए इन इलाकों में न तो रसायनों  छिड़काव हो रहा है और न ही चूना-ब्लीचिंग का छिड़काव किया जा रहा है.

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