पटना

बिहार में थाने-कोर्ट हो रहे हाईटेक, अब अदालतें एक क्लिक पर देख सकती हैं FIR

Smart News Team, Last updated: 21/07/2020 02:13 PM IST
  • बिहार के कोर्ट और पुलिस स्टेशन सीसीटीएनएस नेटवर्क पर काम शुरू कर रहे हैं. अब अदालतों में एफआईआर एक क्लिक के जरिए देखी जा सकेगी. 
बिहार के थाने और अदालत हुई हाई टेक, एक क्लिक से देखेंगे एफआईआर

बिहार के कोर्ट और पुलिस स्टेशन हाई टेक हो रहे हैं. दोनों में अब क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम, सीसीटीएनएस नेटवर्क पर काम किया जाएगा. इसको शुरू करने के लिए लंबे समय से काम चल रहा था. सीसीटीएनएस तकनीक के जरिए थानों से अदालत जुड़ जाएंगी. जिन थानों में इस नेटवर्क को जोड़ दिया गया है उन थानों की एफआईआर आदालत में आसानी से एक क्लिक के जरिए देखी जा सकेगी. 

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थानों की हजारों एफआईआर डिजिटल रूप में आईसीजेएस के पोर्टल पर मिल जाएंगी. इस तकनीक के तहत थानों को कम्प्यूटर नेटवर्क के जरिए स्थानीय अदालतों से लिंक किया गया है. इस तकनीक में सीसीटीएनएस नेटवर्क से जोड़ने का काम 179 थानों में पूरा हो चुका है. 324 थानों  में कम्प्यूटर नेटवर्क लगाने का काम पूरा हो चुका है. जुलाई तक 513 थाना इस नेटवर्क के जरिए जुड़े जाएंगे. 

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सीसीटीएनएस नेटवर्क से जोड़ने के लिए थानों में दर्ज होने वाली एफआईआर को डिजिटल रूप में कंप्यूटर के जरिए नेटवर्क पर डाला जाएगा. इसका नेटवर्क पहले ही तैयार है. इसके अलावा स्टेशन डायरी भी डिजिटल रूप में नेटवर्क पर डाली जाएगी. ये डिजिटल एफआईआर सीसीटीएनएस के सेंट्रल सर्वर के जरिए इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के पोर्टल पर चला जाता है. यहां से ये अदालत में उपलब्ध होता है. अदालत में कभी भी मौजूद कम्प्यूटर नेटवर्क के इस्तेमाल से एफआईआर देखी जा सकती है. 

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सीसीटीएनएस से जोड़े गए 179 थानों की सभी दर्ज एफआईआर को डिजिटल रूप में नेटवर्क पर डाला जा रहा है. जानकारी के मुताबिक 18 जुलाई तक इन थानों में दर्ज 14574 एफआईआर को डिजिटल रूप में नेटवर्क पर डाल दिया गया है. थानों और अदालतों को इस नेटवर्क का फायदा भी हो रहा है. हालांकि अभी अदालतों को हार्ड कॉपी और डिजिटल फार्म दोंनो भेजा जा रहा है, लेकिन सभी थानों के सीसीटीएनएस से जुड़ने के बाद केवल डिजिटल एफआईआर ही भेजी जाएगी. 

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बता दें कि सीसीटीएनएस परियोजना इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का एक हिस्सा है. आईसीजेएस के तहत अदालत, अभियोजन, पुलिस, जेल और एफएसएल को जोड़ा जाएगा. इससे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की सभी संस्थाएं डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़ जाएंगी.

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