कोरोना काल में आफत ही आफत, दूसरे मरीजों को लगाने पड़ रहे अस्पतालों के चक्कर

Smart News Team, Last updated: 21/07/2020 03:29 PM IST
  • कोरोना काल में अन्य बीमारियों के मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा रहा है. गंभीर हालत के मरीज ही अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं. ऐसे में मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.
Patna AIIMS File Photo

बिहार की राजधानी पटना में कोरोना संक्रमित मरीजों के अलावा दूसरी बीमारियों से ग्रसित मरीजों को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कोरोना का इलाज कर रहे अस्पतालों में अन्य बीमारी के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है. ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पतालों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. ये परेशानी पटना के मरीजों में बढ़ गई है. दरअसल कई मरीजों काक हना है कि उन्हें भर्ती न करने के लिए टाला जा रहा है. यदि किसी मरीज को भर्ती कर भी रहे हैं तो इलाज सही से नहीं किया जा रहा है. 

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पीएमसीएच में कोविड वार्ड शुरू नहीं हुआ है. यहां पटना के मरीजों का इलाज होना है. वहां के आइसोलेशन वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था बेहद गंभीर है. इलाज शुरू कराने में भी मरीजों और उनके परिजनों को कई परेशानियां सामने आ रही हैं. यहां तक की इमरजेंसी में आए मरीज जिन्हें तत्काल इलाज की जरूरत है उन्हें भी कोरोना आइसोलेशन में भर्ती कर दिया जा रहा है. इलाज के लिए मरीज का पहले कोरोना जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है. ऐसे में गंभीर रूप से बीमार कई मरीज बिना इलाज के रिपोर्ट के इंतजार में दम तोड़ चुके हैं. 

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वहीं एम्स की बात करें तो वहां कोविड वार्ड शुरू तो हो गया है लेकिन वहां वीवीआईपी और वीआईपी मरीजों के अलावा केवल रेफर हुए मरीजों को भर्ती किया जा रहा है. हालांकि एम्स में 400 सीट हैं पर रविवार तक केवल 303 मरीज ही वहां भर्ती थे. खाली जगह होते हुए भी वहां आम मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है. यहां तक की गंभीर हालत वाले या ऑक्सीजन की सहायता से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भी मना किया जा रहा है. 

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एनएमसीएच में भी ऐसा ही किया जा रहा है. एनएमसीएच में केवल कोरोना मरीज लेने की बात कही जा रही है. हालांकि कोरोना संक्रमित और गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज भी तीन-चार घंटे बाद शुरू किया जा रहा है.

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