हाय री बेदर्द किस्मत: बेटी-दामाद और नाती को रिसीव करने गए थे, मगर लेकर लौटे शव

Smart News Team, Last updated: 19/07/2020 09:02 AM IST
  • पटना में कल सुबह एक दर्दनाक हादसे में सुरेंद्र बिहारी सिंह की बेटी-दामाद और नाती की मौत हो गई। शनिवार सुबह पटना-गया रेलखंड के पोठही स्टेशन के पास अवैध रेलवे क्रॉसिंग के पास उनकी कार ट्रेन की चपेट में आ गई और मौके पर ही उन तीनों की मौत हो गई।
पटना में ट्रेन की चपेट में आई कार।

पटना में कल एक पिता को खुशी इस बात की थी कि उनकी बेटी-दामाद और नाती आने वाले हैं। धरहरा गांव के रहने वाले सुरेंद बिहारी सिंह को बेटी-दामाद और नाती के आने की खुशी इतनी थी कि वे तीनों को रिसीव करने पैदल ही रेलवे लाइन के पास पहुंच गए। मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनकी खुशियां पल भर में मातम में बदल गई और एक हृदयविदारक घटना ने उनकी खुशी छीन ली। जो पिता सुरेंद बिहारी सिंह अपनी बेटी-दामाद और नाती को पैदल ही रिसीव करने निकले थे, जब वह घर लौटे तो उनके साथ तीनों के शव थे।

दर्दनाक : पटना-गया रेलखंड पर ट्रेन की चपेट में आई कार, पति-पत्नी और बेटी की मौत

दरअसल, पटना में कल सुबह एक दर्दनाक हादसे में सुरेंद्र बिहारी सिंह की बेटी-दामाद और नाती की मौत हो गई। शनिवार सुबह पटना-गया रेलखंड के पोठही स्टेशन के पास अवैध रेलवे क्रॉसिंग के पास उनकी कार ट्रेन की चपेट में आ गई और मौके पर ही उन तीनों की मौत हो गई।

दुखों का पहाड़ झेल रहे सुरेन्द्र बिहारी सिंह आंखों देखा हाल बताते-बताते फफक-फफक कर रोने लगे। यहां हैरानी की बात है कि सुरेंद्र के आंखों के सामने यह दर्दनाक हादसा हुआ। वह अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी-दामाद और नाती को दुनिया से दूर होते हुए देख रहे थे। मगर मजबूर थे। दरअसल, सुरेंद्र बिहारी सिंह जब शनिवार की सुबह सोकर उठे तो फोन पर बेटी और दामाद से बात की। जब हमें मालूम हुआ कि दामाद पुनपुन से आगे आ गए हैं तो हर बार की तरह इस बार भी वे घर से निकल कुछ दूर स्थित रेलवे ट्रैक के पास पहुंच गए और कुछ देर बाद दामाद की गाड़ी को रेलवे ट्रैक पार कराने लगे।

सुरेंद्र के मुताबिक, कार उनके दामाद सुमित चला रहे थे, जबकि बगल की सीट पर बेटी निलिका बिहारी और पिछले की सीट पर नाती प्रणीत बैठा था। कार अभी ट्रैक पार करती, तभी उनकी नजर पटना की ओर से आती पटना-रांची जनशताब्दी ट्रेन पर पड़ी। इसके बाद सुरेंद्र की हालत खराब हो गई। उन्होंने तुरंत इशारे में दामाद को कार पीछे ले जाने को कहा, मगर कार का शीशा बंद रहने की वजह से वे इशारा नहीं समझ पाए। हालांकि, निलिका ने इशारे की बात बताई तो सुमित हड़बड़ा गए और गाड़ी ट्रैक पर ही बंद हो गई। जब तक वे तीनों बाहर निकलते तब तक कार ट्रेन की चपेट में आ गई और आंख के सामने उनका घर उड़ गया।

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सुरेंद्र चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। बस लगातार रो रहे थे। बाद में वे घर लौटे पर बेटी-दामाद और नाती के शव लेकर वह भी पुलिस के साथ। शव देखकर गांव में कोहराम मच गया। जिस परिवार को बेटी-दामाद के आने की खुशी थी, वह पलभर में मातम में बदल गया। चारों ओर रोने की चीख सुनाई देने लगी।

इस हृदयविदारक हादसे के बाद निलिका बिहारी के मायके धरहरा में मायूसी छा गई और किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। निलिका के पिता सुरेन्द्र सिंह, उनके बड़े भाई उपेन्द्र सिंह, उनकी मां समेत घर की अन्य महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था।‌ ‌सुरेन्द्र बिहारी सिंह की दो पुत्री थी। उनकी छोटी बेटी स्वीटी अविवाहित है और नोएडा में बड़ी बहन के साथ ही रहकर लक्ष्मीनगर में एक कंपनी में कंपनी सेक्रेटरी है। घर के लोगों ने बताया कि निलिका की शादी 2013 में ही हुई थी।

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