पटना HC की गंगा में मिली लाशों के मामले पर सख्ती, मार्च से अब तक का ब्यौरा मांगा

Smart News Team, Last updated: Mon, 17th May 2021, 11:00 PM IST
  • पटना हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब तलब करते हुए कहा है कि गंगा नदी में एक मार्च से लेकर अब तक कितनी लाशें मिल चुकी हैं. धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार कितने शवों का दाह संस्कार हुआ है और कितने शवों को दफनाया गया है.
पटना HC की गंगा में मिली लाशों के मामले पर सख्ती, मार्च से अब तक का ब्यौरा मांगा

पटना। बिहार के बक्सर में गंगा नदी में बड़ी संख्या में लाशें मिलने के मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट ने जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब तलब करते हुए कहा है कि गंगा नदी में एक मार्च से लेकर अब तक कितनी लाशें मिल चुकी हैं. धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार कितने शवों का दाह संस्कार हुआ है और कितने शवों को दफनाया गया है. कोर्ट ने इस संबंध में मुख्य सचिव को तीन दिन के अंदर-अंदर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है. वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को विशेषज्ञ कमेटी और कोर्ट मित्र की रिपोर्ट पर सुनवाई की जाएगी.

सोमवार को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की. कोर्ट ने मामले के संबंध में कहा कि राज्य सरकार के मुख्य सचिव तथा पटना प्रमंडलीय आयुक्त के हलफनामा में कई मतभेद हैं. मुख्य सचिव के शपथ पत्र में कहा गया है कि बक्सर में गंगा में 9 तैरती लाश मिली हैं. वहीं मामले के बारे प्रमंडलीय आयुक्त का कहना है कि 850 से 900 कोविड मरीज का अंतिम संस्कार किया गया है. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि एक मार्च से अब तक कितने कोविड और कितने नॉन कोविड को जलाया गया है. कितने को दफनाया गया है, इसका पूरा ब्यौरा दें.

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इसके अलावा खंडपीठ ने चल रही ऑक्सीजन की समस्या को लेकर भी सुनवाई की है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि बिहार को 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन के साथ साथ सिलेंडर भी उपलब्ध कराए गए हैं. इसका वितरण करना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. कोर्ट ने इस संबंध में मुख्य सचिव को इसकी जानकारी देने के लिए भी कहा है. इसके अलावा कोर्ट ने कालाबाजारी में पकड़े गए सिलेंडर के बारे में भी जानकारी मांगी है.

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कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लम्बे समय तक खड़े खड़े 15 एंबुलेंस खराब हो गयी हैं. जिसके बाद कोर्ट ने इस संबंध में भी जवाब तलब किया है और इसके साथ ही यह भी कहा है कि एंबुलेंस संचालन में एनजीओ और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं और समाजसेवियों की भी मदद ली जाए.

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