महिलओं के कपड़े धोने का आदेश देने वाले जज के न्यायिक कार्य पर लगी रोक, ये है मामला

Shubham Bajpai, Last updated: Sun, 26th Sep 2021, 3:32 PM IST
  • पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी सिविल कोर्ट के जज अविनाश कुमार के न्यायिक कार्य पर रोक लगा दी है. सिविल जज अविनाश कुमार ने एक छेड़छाड़ के आरोपी को गांव की महिलाओं के कपड़े धोने और प्रेस करने की शर्त पर जमानत दी थी. जिस वजह से हाईकोर्ट ने ये कार्रवाई की.
महिलओं के कपड़े धोने का आदेश देने वाले जज के न्यायिक कार्य पर लगी रोक

पटना. मधुबनी के सिविल कोर्ट के एडीजे (प्रथम) अविनाश कुमार के न्यायिक कार्य करने पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगा दी. उन पर ये रोक उनके एक फैसले को लेकर लगाई गई, जिसमें उन्होंने छेड़छाड़ के आरोपी को गांव की महिलाओं के कपड़े धोने और प्रेस करने की शर्त पर जमानत दे दी थी. जिसके बाद ये मामला तूल पकड़ा गया और पटना हाईकोर्ट ने इस पर कार्रवाई करते हुए अविनाश कुमार के न्यायिक कार्य पर रोक लगा दी.

कोर्ट के अगले आदेश तक न्यायिक कार्य से रहेंगे दूर

जानकारी अनुसार, हाईकोर्ट ने इस संबंध में दो दिन पहले ही आदेश जारी कर दिया था. जिसमें कहा गया है कि एडीजे अविनाश कुमार हाईकोर्ट के इस संबंध में अगले आदेश तक न्यायिक कार्यों से दूर रहेंगे.

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जमानत के लिए रखी थी ये शर्त

मधुबनी के सिविल कोर्ट में एडीजे के पद पर तैनात अविनाश कुमार ने एक महिला के साथ छेड़छाड़ के मामले में आरोपी व्यक्ति को जमानत देने के लिए शर्त रखी कि आरोपी को अपने गांव की सभी महिलाओं के कपड़े मुफ्त में धोने के साथ प्रेस करने होंगे. जिसको लेकर अविनाश कुमार ने आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए आदेश जारी कर दिए.

अजीबो-गरीब आदेशों के लिए काफी समय से सुर्खियों में

जज अविनाश कुमार ने पहली बार ऐसा अजीबो-गरीब आदेश नहीं दिया इससे पहले भी कई मामलों वो इस तरह का आदेश दे चुके हैं. उन्होंने कई मामलों में कपड़ा धोने, नाली साफ करने और बच्चों को दूध पिलाने समेत कई अन्य आदेश जारी कर चुके हैं.

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बता दें कि अप्रैल 2021 से जेल में बंद आरोपी के वकील ने अदालत से कहा था कि आरोपी की उम्र महज 20 साल है. आरोपी पेशे से धोबी औऱ समाज की सेवा करना चाहता है. जिसको लेकर कोर्ट ने कपड़े धोने का आदेश जारी किया. इस इच्छा को लेकर आरोपी के वकील ने कोर्ट में हलफनामा भी लगाया था.

 

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