पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटा, कहा- ट्रेनिंग की सख्त जरूरत

Smart News Team, Last updated: Wed, 14th Apr 2021, 1:42 PM IST
  • पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार मामले में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है. रेप के आरोपी को आरोपों से मुक्त करके रिहा कर कहा कि कोर्ट सहानभूति से नहीं चलता है. यहां कानून का पालन करना होता है.
पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदला.

पटना. पटना हाईकोर्ट ने संस्कृत के श्लोक और स्वर्गीय जगजीत सिंह की गजल लिखकर फैसला देने वाली निचली अदालत के जज पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे न्यायिक अधिकारी को ट्रेनिंग की सख्त जरूरत है. पटना हाईकोर्ट का कहना है कि उन्हें पॉक्सो कानून की ट्रेनिंग की जरूरत है. कोर्ट ने बिहार ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक को हाईकोर्ट के फैसले और निचली अदालत के आदेश की कॉपी भेजने को कहा है. इसी के साथ पटना हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाए जिससे भविष्य में यह दोहराया नहीं जा सके.

जानकारी के लिए बता दें कि मामला बेतिया के इनरवा थाना कांड संख्या 43/2018 से जुड़ा था. कोर्ट ने इस मामले पर कहा कि रेप की पीड़िता की मां और परिजन निचली अदालत में सुनवाई के दौरान घटना से मुकर गए. वह कोर्ट में होस्टाइल हो गए. इतना ही नहीं पीड़िता ने खुद कोर्ट में कहा कि वो बलात्कारी को नहीं पहचान सकती है. इस मामले में पीड़िचा का मेडिकल टेस्ट करने वाली महिला डॉक्टर को भी पेश करके गवाही नहीं कराई गई. 

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पटना हाईकोर्ट का कहना है कि इतना सब होने के बाद भी निचली अदालत ने कैसे आरोपी को दस साल की सजा और दो लाख का जुर्माना देने का फैसला किया. हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल करते हुए कहा कि कोर्ट सहानभूति से नहीं चलता है. यहां कानून का पालन करता होता है. हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रावधानों का पालन कर ही न्याय करना होता है. पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करके आरोपी को आरोपों से मुक्त कर रिहा कर दिया है. 

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