लॉअर कोर्ट से बेल नहीं तो बिहार की जेल में कैद लंबी, हाईकोर्ट जज के दो तिहाई पद खाली

Smart News Team, Last updated: Wed, 25th Aug 2021, 9:17 PM IST
  • पटना हाईकोर्ट में जज के 53 में 34 पद खाली हैं. मात्र 19 न्यायाधीश के सहारे बिहार का यह हाईकोर्ट चल रहा है जिसकी वजह से लंबित केस की संख्या लगातार बढ़ रही है. हाल ये है कि अगर लॉअर कोर्ट से बेल ना मिले तो हाईकोर्ट में अपील करने के बाद सुनवाई में महीनों का वक्त लग सकता है.
लॉअर कोर्ट से बेल नहीं तो बिहार की जेल में कैद लंबी, हाईकोर्ट जज के दो तिहाई पद खाली

पटना. पटना हाईकोर्ट में जज के लगभग दो तिहाई पद खाली रहने की वजह से बिहार में उच्च न्यायालय में लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है. पटना हाईकोर्ट में दिसंबर, 2020 में 1,70,800 केस पेंडिंग थे जो अब बढ़कर 2,13,000 के करीब पहुंच चुका है. पटना हाईकोर्ट में जज के 53 पद हैं लेकिन बिहार के इस हाईकोर्ट में इस समय मात्र 19 न्यायाधीश मुकदमों का निपटारा कर रहे हैं. सितंबर में एक और जज रिटायर हो रहे हैं जिसके बाद यह संख्या घटकर 18 और खाली पदों की संख्या 35 तक जा सकती है अगर तब तक नए जजों की नियुक्ति नहीं हुई.

सूत्रों का कहना है कि इस साल पटना हाईकोर्ट में जज नियुक्ति के लिए 35 नाम की सिफारिश भेजी गई है जिसमें कई वकील भी शामिल हैं लेकिन उनमें कोई नाम अभी तक क्लीयर नहीं हो पाया है. हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एपी साही ने अगस्त, 2018 में 24 नाम की सिफारिश की थी जिसमें 15 पैक्टिस कर रहे वकील (बार) थे. वकील और कोर्ट को बार एंड बेंच के नाम से भी जाना जाता है. जस्टिस साही के भेजे नाम में किसी की नियुक्ति नहीं हुई. उनके बाद चीफ जस्टिस बने मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने इस साल 15 जनवरी को पहली सिफारिश में चार नाम भेजे. 11 फरवरी को उन्होंने 11 और नाम भेजे. बाद में बार से 8 और वकीलों के नाम भेजे गए. लेकिन पटना हाईकोर्ट में किसी जज की नियुक्ति नहीं हो सकी है.

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वरिष्ठ वकील पीके शाही ने कहा है कि हाईकोर्ट जज के पद खाली रहने से एक तो केस के निपटारा में देरी हो रही है तो दूसरी ओर लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा- "जमानत तक के लिए लोगों को 8-10 महीने का इंतजार करना पड़ रहा है. पक्षकार मुश्किल में हैं. रिट पेटिशन पर भी सुनवाई में देरी हो रही है. हम इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते कि सिफारिश क्यों ठुकराई जा रही है या लटकी हुई है लेकिन निश्चित रूप से न्याय देने पर इसका असर पड़ा है."

पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने भी न्याय में देरी का जिक्र करते हुए कहा कि अर्जेंट केस और विकास के मामलों की सुनवाई तक पर इसका असर हो रहा है. अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने एक समय सीमा के अंदर हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति करने की सलाह दी थी. न्यायिक नियुक्ति को लेकर मौजूदा व्यवस्था में केंद्र सरकार के लिए कोई समय सीमा नहीं है कि वो कब सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे. देश भर के हाईकोर्ट में लगभग 40 परसेंट जजों के पद खाली हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसको देखते हुए सरकार और न्यायपालिका के बीच सहभागिता पर जोर देते हुए 18 सप्ताह में हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने की बात की थी.

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