बिहार: हाईकोर्ट ने हटाई एसटीईटी रिजल्ट पर लगी रोक, शुरू होंगी 37 हजार भर्तियां

Smart News Team, Last updated: 04/03/2021 11:06 PM IST
  • पटना हाईकोर्ट द्वारा माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एसटीईटी के रिजल्ट के प्रकाशन पर लगाई गई रोक को हटा दिया है. गुरुवार को प्रकाशन पर रोक हटाए जाने के बाद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता खुल गया है.
बिहार: हाईकोर्ट ने हटाई एसटीईटी रिजल्ट पर लगी रोक, शुरू होंगी 37 हजार भर्तियां

पटना: पटना हाईकोर्ट द्वारा माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एसटीईटी के रिजल्ट के प्रकाशन पर लगाई गई रोक को हटा दिया है. गुरुवार को प्रकाशन पर रोक हटाए जाने के बाद माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता खुल गया है. रोक हटाए जाने के बाद लगभग 37,000 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी. हाईकोर्ट के न्यायाधीश ए अमानुल्लाह की एकल पीठ ने गुरुवार को आदित्य प्रकाश द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया.

ज्ञात हो कि पिछले साल 26 नवंबर को विज्ञापन के अनुसार परीक्षा नहीं लिए जाने के कारण एसटीईटी की परीक्षा के रिजल्ट के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई थी, जिसकी वजह से सैकड़ों छात्र शिक्षकों की भर्ती/नियुक्ति से वंचित रह गए थे. एसटीइटी की परीक्षा पहली बार जनवरी 2019 में हुई थी जिसके बाद बहुत सी शिकायतें आने पर इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद दूसरी बार नौ सितंबर से लेकर 21 सितंबर के बीच परीक्षा का आयोजन किया गया था.

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एक याचिकाकर्ता ने न्यायालय को बताया कि परीक्षा ऑनलाइन मोड से ली गई थी, इस वजह से अनेक अभ्यर्थी परीक्षा में इसलिए नहीं सफल हो पाए क्योंकि कंप्यूटर के माध्यम से परीक्षा ली गई, जो कि उचित नहीं था. सभी अभ्यर्थी कंप्यूटर और नई तकनीक से वाकिफ नहीं थे. एसटीईटी की परीक्षा ऑफलाइन होनी चाहिए थी, ताकि सभी अभ्यर्थियों को एक समान मौका मिलता.

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बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के वरीय अधिवक्ता ललित किशोर एवं अधिवक्ता ज्ञान शंकर ने सम्मिलित रूप से बताया कि कोविड-19 के चलते यह सब हुआ. इसके लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने राज्य सरकार से अनुमति भी ली थी. कोरोना काल में इस तरह की परीक्षा संभव नहीं थी. याचिकाकर्ता ने एक और आरोप लगाते हुए कहा कि एसटीइटी की इस परीक्षा में सिलेबस का ख्याल नहीं किया गया था. सिलेबस में स्नातक और स्नातकोत्तर लेवल के सवाल पूछे गए थे. न्यायालय को यह भी बताया गया था कि यह वही छात्र हैं जो ऑनलाइन मोड की परीक्षा में असफल रहे हैं इन्हें यह चुनौती देने का भी अधिकार नहीं है, जिसे अदालत ने स्वीकार किया और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को यथाशीघ्र रिजल्ट का प्रकाशन करने का भी आदेश दिया है.

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