परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में तो दूसरे को अनुकंपा नहीं: पटना HC

Smart News Team, Last updated: Tue, 6th Jul 2021, 7:45 AM IST
पटना हाईकोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डॉ अनिल कुमार उपाध्याय की एकल पीठ ने यह आदेश दिया है कि जब परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है तो परिवार के कोई दूसरा सदस्य अनुकंपा के जरिए नौकरी नहीं पा सकता है. कोर्ट ने विभाग के अनुकंपा पर नौकरी नहीं देने के फैसले को सही माना है.
उच्च न्यायालय पटना. (प्रतीकात्मक फोटो)

पटना : पटना हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि जब परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा का लाभ नहीं दिया जा सकता है. पटना हाई कोर्ट ने यह फैसला हरेंद्र कुमार की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति डॉक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए दिया. इसके अलावा पीठ में हरेंद्र कुमार की दायर याचिका को भी खारिज कर दिया. साथ ही कोर्ट ने कहा कि आवेदक ने पहले ही यह माना है कि उसका एक भाई सरकारी नौकरी कर रहा है. ऐसे में उसे आर्थिक मदद की कोई जरूरत नहीं है. इसलिए विभाग का नौकरी न देने का फैसला सही है.

दरअसल हुआ यह कि याचिका आवेदक के पिता पुलिस विभाग में नौकरी करते थे. नौकरी के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई. अब परिवार के सदस्य ने नौकरी के लिए विभाग में आवेदन कर दिया. इस पर विभाग ने मृतक पुलिस के परिवार को कहा कि जब उनके घर का एक सदस्य सरकारी नौकरी कर रहा है तो परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी बहाल नहीं की जा सकती है. विभाग के इस जवाब को सुनकर मृतक कर्मी के दूसरे पुत्र ने हाई कोर्ट में जाकर विभाग के इस फैसले को चुनौती दे दी.

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विभाग के इस फैसले पर ही हाई कोर्ट में सुनवाई करते हुए कहा कि अनुकंपा के जरिए नौकरी देने की व्यवस्था सरकारी कर्मचारी के मरने के बाद उसके परिवार को किसी तरह की आर्थिक समस्या न हो इसके लिए यह नीति अपनाई गई है. इस नीति का उद्देश्य परिवार को वित्तीय सहायता देने का है. इसके अलावा कोर्ट ने कहा, कि अनुकंपा के जरिए नौकरी पाना किसी कर्मी के सदस्य का अधिकार बिल्कुल नहीं है.

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