पटना

पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, लोकायुक्त कोई सुपर एग्जीक्यूटिव संस्था नहीं है

Smart News Team, Last updated: 05/06/2020 09:43 PM IST
बिहार में लोकायुक्त को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बड़ी तल्ख टिप्पणी की है। पटना हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एक लोकायुक्त के आदेश के संदर्भ में कहा कि लोकायुक्त कोई सुपर एग्जीक्यूटिव संस्था नहीं है जो सरकारी कर्मियों को नियंत्रित या सुपरवाइज करे।
Patna High Court

बिहार में लोकायुक्त को लेकर पटना हाईकोर्ट ने बड़ी तल्ख टिप्पणी की है। पटना हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान एक लोकायुक्त के आदेश के संदर्भ में कहा कि लोकायुक्त कोई सुपर एग्जीक्यूटिव संस्था नहीं है जो सरकारी कर्मियों को नियंत्रित या सुपरवाइज करे। पटना हाईकोर्ट ने लोकायुक्त के आदेश पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाएं। कोर्ट ने कहा कि बिहार लोकायुक्त अधिनियम कानून से बाहर जाकर लोकायुक्त कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकते हैं। किसी लोक सेवक के खिलाफ अगर भ्रष्टाचार, पद का दुरुपयोग, निजी स्वार्थ या आर्थिक लाभ के लिए किये गए कार्य की शिकायत मिलने पर जांच में आरोप सही पाए जाने पर नियम के तहत ही कार्रवाई कर सकते हैं। लेकिन किसी अधिकारी को दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करने का दबाव नहीं दे सकते हैं।

लोकायुक्त कोई सुपर एग्जीक्यूटिव संस्था नहीं है

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि लोकायुक्त कोई सुपर एग्जीक्यूटिव संस्था नहीं है, जो कार्यपालिका को नियंत्रित या सुपरवाइज करे। लोकायुक्त अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते समय इस कानूनी संस्था के गठन के उद्देश्य को ध्यान में रखें। कोई भी कानूनी संस्था कानूनी दायरे से बाहर नहीं जा सकती है।

कोर्ट ने और क्या-क्या कहा

कोर्ट ने कहा कि आरोपी लोकसेवक के खिलाफ शिकायत सही मिलने पर स्पेशल कोर्ट में मुकदमा दायर करने और सक्षम पदाधिकारी को आरोपित लोक सेवक के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है। लेकिन सीधे कार्रवाई करना लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्रशासनिक कार्यवाही का ज्यूडिशियल रिव्यू करने का अधिकार हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत है। मगर लोकायुक्त को यह शक्ति प्राप्त नहीं है।

11 पन्ने का आदेश

जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की सिंगल पीठ ने बिपिन बिहारी की रिट याचिका को मंजूर करते हुए 21 पन्ने का आदेश दिया। लोकायुक्त (न्यायिक सदस्य) ने 4 अप्रैल 2019 को बिहार के निबंधक सहयोग समिति को आवेदक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का आदेश दिया था। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

जानें क्या था मामला

पंडारक के कुछ ग्रामीणों ने तत्कालीन अंचलाधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त के यहां शिकायत कर आरोप लगाया था कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लोकायुक्त ने आवेदक तत्कालीन अंचलाधिकारी के जवाब को खारिज करते हुए उनके खिलाफ बड़ी सजा देने के लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव को दिया था।

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