राजेंद्र प्रसाद की स्मारकों की बदहाली पर HC सख्त, केंद्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

Shubham Bajpai, Last updated: Fri, 24th Dec 2021, 7:33 AM IST
  • देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की स्मारकों की बदहाली पर दायर एक लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र व राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा दायर करने के आदेश देते हुए तीन सदस्यीय वकीलों की कमेटी बनाई, जो जाकर स्मारकों की जांच करेगी.
राजेंद्र प्रसाद की स्मारकों की बदहाली पर HC सख्त, केंद्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

पटना. बिहार का सीवान देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली के लिए प्रसिद्ध है और लोग दूर-दूर से सीवान के जीरादेई उनकी जन्मस्थली पर बने उनके घर को देखने आते हैं लेकिन अव्यवस्था की वजह से ये बदहाली झेल रहा है. जिसको लेकर पटना हाईकोर्ट में अधिवक्ता विकास कुमार ने एक लोकहित याचिका दायर की. जिसकी सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने राजेंद्र बाबू के सीवान और पटना के बांसघाट व सदाकत आश्रम स्थित स्मारकों की बदहाली की जांच करने के लिए तीन वकीलों की टीम बना जांच करने के आदेश दिए.

हाईकोर्ट ने इस स्मारकों की बदहाली पर केंद्र व बिहार की नीतीश सरकार से जवाबी हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं. इश मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने अगली तारीख 3 जनवरी दी है.

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इन वकीलों को मिला जांच कर कोर्ट को स्थिति बताने का जिम्मा

पटना हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस. कुमार की खड़पीठ ने लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट को स्मारकों की स्थिति बताने की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार, अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह तथा संजीव कुमार को दी है. ये जांच टीम स्मारकों की स्थिति की जांच करके अगली तारीख में कोर्ट को स्थिति से अवगत कराएगा.

स्मारक की देखभाल को तैनात कर्मी नहीं करते काम

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीके शाह ने कोर्ट को बताया कि इस स्मारकों की देखभाल के लिए कर्मी तैनात किए गए हैं. लेकिन वे वहां नहीं रहते हैं. जिसके चलते स्मारकों की स्थिति इतनी खराब है. राजेंद्र प्रसाद के सीवान के जीरादेई को जाने वाली रोड की स्थिति खराब है. उनके मकान के आगे का ओसारा, बरामदा कई जगह से टूट चुका है और उनसे जुड़े सामान को एक कमरे में फेंक दिया गया है. कई कमरों का दरवाजा टूट गया है.

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हर साल होता काफी खर्चा, लेकिन स्थिति जस की तस

वकील ने कोर्ट को बताया कि हर साल केंद्र सरकार इन स्मारकों के रखरखाव के लिए काफी खर्चा करती है लेकिन पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हो पाने की वजह से समारकों की दुर्दशा साफ नजर आ रही है. इसको लेकर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य व केंद्र सरकार से जवाबी हलफनामा जमा करने के आदेश दिए हैं. इस मामले पर अगली सुनवाई 3 जनवरी है.

 

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