पटना हाईकोर्ट ने कोरोना पर सरकार को लगाई फटकार, कहा-इलाज की स्थिति ठीक नहीं

Smart News Team, Last updated: Wed, 9th Sep 2020, 11:44 AM IST
  • कोरोना मामले की गंभीरता को लेकर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोरोना मरीजों की स्थिति भयावह है. इलाज की स्थिति ठीक नहीं है. पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कोरोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने कोरोना से जुड़े आधे दर्जन मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की.
पटना हाइकोर्ट

पटना. बिहार में कोरोना का कहर जारी है. कोरोना मामले की गंभीरता को लेकर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कोरोना मरीजों की स्थिति भयावह है. इलाज की स्थिति भी ठीक नहीं है.  

जानकारी के अनुसार मंगलवार को पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कोरोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने कोरोना से जुड़े आधे दर्जन मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान पता चला कि लगातार चौथी बार स्वास्थ्य विभाग ने पटना हाईकोर्ट में अपना जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया है. इसपर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई. पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के कोरोना रोकथाम की व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की. 

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पटना हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना मरीजों की स्थिति राज्य में कितनी भयावह है, इससे वे निजी तौर पर परिचय हैं. बताया जा रहा है कि पटना हाईकोर्ट का एक स्टाफ कोरोना संक्रमित पाया गया था. इसपर पटना हाईकोर्ट ने कहा कि स्टाफ के इलाज में लापरवाही से स्पष्ट हो गया कि बिहार में कोरोना मरीजों के इलाज की स्थिति ठीक नहीं है. 

जानकारी के अनुसार वकील दीनू कुमार और रीतिका रानी ने पटना हाईकोर्ट से कहा कि सरकार आरटीपीसीआर जांच को लेकर कुछ नहीं बताना चाहती है. वकील दीनू कुमार और रीतिका रानी ने बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार का कहना है प्रतिदिन साढ़े 11 हजार जांच हो रहे है, जबकि सच्चाई ये है कि प्रतिदिन चार हजार से भी कम की जांच रही है.

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वकील दीनू कुमार और रीतिका रानी ने बताया कि सरकार का दावा है कि आरटीपीसीआर जांच के लिए कुल 9 लैब हैं, लेकिन यह जांच कुछ गिने-चुने लोगों तक ही सीमित है. साथ ही अभी तक किसी भी कोरोना वार्ड में CCTV कैमरा तक को नहीं लगाया है. वहीं, सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को फटकार लगाया. कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार जवाबी हलफनामा दाखिल करें.  साथ ही पूछे गए 9 बिंदुओं पर जवाब 2 सप्ताह के अंदर पटना हाईकोर्ट में दाखिल करें.

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