कोरोना काल में बीमार पत्नी को ले भटकते रहे PMCH के डॉक्टर, इलाज बिना हो गई मौत

Smart News Team, Last updated: 26/07/2020 10:18 AM IST
  • बिहार में अभिशाप बना कोरोना काल, PMCH के डॉक्टर की पत्नी को भी किसी अस्पताल में नहीं मिला इलाज तो चली गई जान। 
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बिहार में कोरोना काल अब कितना भयावह होता जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का डॉक्टर पत्नी के इलाज के लिए दर-दर भटकता है, मगर कहीं समय पर इलाज नहीं मिल पाने से पत्नी से हाथ भी धो बैठता है। दरअसल, बीमार पत्नी का इलाज कराने के लिए पीएमसीएच के डॉक्टर रंजीत कुमार सिंह शहर के ज्यादातर बड़े अस्पताल की चौखट तक गए। बीमार पत्नी को भर्ती कर लेने के लिए हर जगह हाथ जोड़ विनती की, डॉक्टरों से लेकर मैनेजर तक की गुहार लगाई, कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तब भी किसी ने उनकी एक नहीं सुनी और आखिरकार इलाज के अभाव में उनकी 44 वर्षीय पत्नी बरखा सिंह ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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इस तरह से कोरोना काल में अस्पतालों की मनमानी और गैर जिम्मेदाराना रवैये की वजह से पीएमसीएच नेत्र रोग विभाग में मेडिकल ऑफिसर डॉ रंजीत का परिवार उजड़ गया, उनकी पत्नी की मौत हो गई और उनकी इकलौती बेटी के सिर से मां का आंचल हट गया।

बताया जा रहा है कि डॉ. रंजीत की पत्नी शुगर और बीपी की मरीज थीं। गुरुवार को उनकी तबीयत खराब देख सुबह में उन्हें कुर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां तीन घंटे में उनकी स्थति कुछ सामान्य हुई। शाम को वहां के डॉक्टरों ने किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी, जहां हृदय रोग विशेषज्ञ की सेवा मिल सके। वे वहां से पाटलिपुत्रा के अस्पताल में ले गए। वहां उनकी कोरोना जांच की गई। निगेटिव आने पर ओपीडी में लिया गया।

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जब स्थिति थोड़ी बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने आईसीयू में भर्ती कराने की बात कही। मगर सिटी स्कैन में छाती में न्यूमोनिया होने की वजह से अस्पताल ने आईसीयू में लेने से इनकार कर दिया और उन्हें तत्काल दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी।

इसके बाद डॉक्टर रंजीत अपनी पत्नी को बेली रोड के बड़े अस्पताल में ले गए। वहां 40 मिनट तक पूछताछ करने के बाद पत्नी को भर्ती से इनकार कर दिया। डॉक्टर ने लाख गुहार लगाई, मिन्मतें कीं, मगर किसी ने उनकी एक नहीं सुनी। इसके बाद आईजीआईसी आए लेकिन वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने उन्हें अच्छे सेंटर में ले जाने की सलाह दे दी। रात को लगभग 10:30 बजे वे अपने परीचित डॉक्टर से बात कर एम्स में भर्ती कराने ले गए। लगभग आधा घंटे तक गेट पर रोके जाने के बाद वहां के एक परीचित डॉक्टर की पहल पर अस्पताल के अंदर पहुंचे। तबतक उनकी पत्नी दम तोड़ चुकी थीं।

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