पटना

जब DNA जांच ने खोए मासूस को असली मां-बाप से मिलाया, दो दंपतियों ने किया था दावा

Smart News Team, Last updated: 13/06/2020 03:02 PM IST
  • तकनीक के आपने कई फायदे सुने होंगे, मगर बिहार के पटना में तकनीक ने ऐसा कमाल दिखाया कि एक मां-बाप को उसके खोए मासूम बच्चे से मिला दिया।
प्रतीकात्मक तस्वीर

पटना, प्रिय रंजन शर्मा

तकनीक के आपने कई फायदे सुने होंगे, मगर बिहार के पटना में तकनीक ने ऐसा कमाल दिखाया कि एक मां-बाप को उसके खोए मासूम बच्चे से मिला दिया। पटना के बंकाघाट रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिले ढाई साल के मासूस को वैज्ञानिक अनुसंधान ने उसके माता-पिता से मिला दिया। हालांकि, बच्चे का मां-बाप से मिलने का यह सफर कतई आसान नहीं था। इस बच्चे पर उसके असल मां-बाप के अलावा एक और दंपति ने दावा ठोका था। बच्चे पर दो दंपतियों के दावे ने पुलिस और बाल कल्याण समिति दोनों को ही मुश्किल में डाल दिया था। अंत में इस बच्चे के असली माता-पिता कौन हैं, इस उलझन को सुलझाने के लिए डीएनए जांच कराने का फैसला लिया गया। इस प्रक्रिया में भले ही कई महीने लग गए, मगर जांच रिपोर्ट ने बच्चे को उसके असली माता-पिता तक पहुंचा दिया।

स्टेशन पर लावारिस मिला था मासूम

पटना के बंकाघाट रेलवे स्टेशन पर पिछले साल अगस्त में लावारिस हालत में एक मासूम मिला था। रेल पुलिस ने बच्चे को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। इस बीच को लेने के लिए वैशाली और औरंगाबाद के दो दंपति सामने आए और बच्चे को अपना संतान बताने लगे। दोनों का दावा था कि यह बच्चा उनका है। दावों के आधार पर बच्चा किसी एक दंपति को नहीं सौंपा जा सकता था। इसलिए कुछ दिनों बाद मामला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के पास पहुंचा। दंपतियों के दावे को जांचने के लिए समिति ने डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया। रिपोर्ट आने तक बच्चे को समिति की निगरानी में रखा गया।

बच्चे के साथ पांच सैंपल की हुई जांच

बच्चे के माता-पिता का पता लगाने के लिए पांच ब्लड सैंपल लिए गए। बच्चे के अलावा दावा करने वाले दोनों दंपतियों के ब्लड सैंपल को डीएनए लैब भेजा गया। सभी ब्लड सैंपल की प्रोफाइलिंग की गई और उनके डीएनए का मिलान किया गया। इनमें एक दंपति दिनेश कुमार और उमा देवी (काल्पनिक नाम) से बच्चे का डीएनए मैच कर गया। यानी बच्चे के असली माता-पिता वही थे। वहीं डीएनए रिपोर्ट के बाद दूसरे दंपती का दावा खारिज हो गया।

डीएनए ने बता दिया असली मां-बाप कौन

डीएनए रिपोर्ट के बाद मासूस को सीडब्ल्यूसी द्वारा उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। सीडब्ल्यूसी की पटना जिला अध्यक्ष संगीता कुमारी ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद बच्चे को उसके असली माता-पिता को सौंप दिया गया है। दावा करने वाले दोनों ही दंपती के बच्चे गुम हुए थे। पुराने फोटो के आधार पर वह बच्चे को अपना बता रहे थे, इसलिए डीएनए जांच कराने का फैसला लिया गया।

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