किसी को नहीं ट्रांसजेंडरों की परवाह, कोरोना काल में ना आर्थिक मदद मिली ना राशन

Smart News Team, Last updated: 25/07/2020 02:43 PM IST
  • कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में ट्रांसजेंडरों को न आर्थिक सहायता न ही राशन मिला है. ऐसे में उनकी हालत खराब है. केवल पटना में दो हजार से अधिक ट्रांसजेंडर रह रहे हैं.
प्रतिकात्मक फोटो

सविता, पटना

दूसरों को दुआ देने वाले हाथ, भीख मांगने को विवश हैं. भीख भी मांगे तो कहां मांगे, लॉकडाउन में सब घरों में कैद हैं. न खाने को कुछ मिल रहा है और न रहने का कोई ठिकाना.

खुद के घर जा रहे हैं तो अपनाने को कोई तैयार नहीं. ऐसी मानसिक यातना झेलने को मजबूर हो रहे हैं राज्य के ट्रांसजेंडर. मानसिक तनाव से लॉकडाउन में छह ट्रांसजेंडरों ने मौत को गले लगा लिया है. बेगूसराय, सासाराम, बेतिया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया में ट्रांसजेंडरों के आत्महत्या का मामला प्रकाश में आया है.

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ट्रांसजेंडरों को न तो कोई आर्थिक सहायता मिल रही है और न जन वितरण प्रणाली के तहत सूखा राशन ही मिल रहा है. पटना की वीरा यादव राशन कार्ड के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर हाईकोर्ट ने आदेश दिया था बिना किसी कागज के राशन दिया जाएगा. आदेश को एक महीना से अधिक हो गया है फिर भी ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को राशन नहीं मिल रहा है. 

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मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ पटना में दो हजार से अधिक ट्रांसजेंडर हैं. ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली रेशमा प्रसाद बताती हैं कि लॉकडाउन में हमलोगों की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. हम घर भी जाना चाहते हैं तो गांव में लोग बाल काटकर लड़के जैसा रहने को मजबूर करते हैं या गांव से भगा देते हैं.

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घर में नहीं लिया जा रहा

नालंदा के एक ट्रांसजेंडर ने लिंग चेंज करवाया है. सर्जरी करवाकर जब वह गांव गई तो परिवार ने रख लिया लेकिन गांव वालों ने यह कहकर गांव में रहने देने से इनकार कर दिया कि गांव में कोई ट्रांसजेंडर नहीं रह सकता है. उसने पुलिस से भी मदद मांगी, फिर भी कोई सुनवायी नहीं हुई. वह पिछले एक महीने से जहां-तहां छुपती फिर रही है.

 

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