पटना का अनोखा डॉक्टर जो ऑपरेशन थिएटर में संगीत बजाकर सर्जरी पर शायरी करता है

Shubham Bajpai, Last updated: Fri, 31st Dec 2021, 4:33 PM IST
  • पटना के डॉ.अजीत प्रधान डॉक्टर सिर्फ हार्ट सर्जन के तौर पर नहीं बल्कि इस बात के लिए प्रसिद्ध हैं जो टूटे दिल को अपनी दवाओं और फैज, बेगम अख्तर और भीमसेन जोशी सरीके संगीतज्ञों के सुरों के साथ ठीक करते हैं. अजीत को संगीत से इतना प्रेम है कि ऑपरेशन के दौरान थियेटर में संगीत की धुन गूंजती रहती है.
डॉ. अजीत प्रधान (फोटो सभार इंटरनेट मीडिया)

पटना. संगीत किसी व्यक्ति के जीवन में क्या प्रभाव डाल सकता है. इसका जीता जाता उदाहरण है पटना के कार्डियक सर्जन डॉ. अजीत प्रधान. जो पिछले 20 साल से पटना में लोगों के दिल का इलाज कर रहे हैं लेकिन इनके इलाज करने का तरीका थोड़ा अलग है. टूटे दिल को सुई से सीने के साथ बेगम अख्तर की गजलों के सुरों से भी ठीक करते हैं. जब हाथ सर्जरी के दौरान खून से लथपथ होता है, तब अनायस ही फैज अहमद फैज के शेर मरीज की हालत बयां करने लगते हैं. 

अंग्रेजी मैगजीन आउटलुक में छपी रिपोर्ट के मुताबिक संगीत से अजीत प्रधान का कुछ ऐसा नाता है. हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत प्रशिक्षित अजीत प्रधान के जीवक हार्ट अस्पताल में मरीजों के दिल का इलाज संगीत के साथ होता है. यहां दवाओं के साथ संगीत की धुनों के बीच बाईपास सर्जरी से लेकर बड़ी-बड़ी बीमारियां ठीक की जाती है.

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इस बात का दुख की संगीत को नहीं बना पाया प्रोफेशन

थोड़ा सा उदास होते हुए डॉ. अजीत प्रधान कहते हैं कि आज डॉक्टर हूं और हजारों सर्जरी कर चुका हूं. कई लोगों की जान बचाने का एक सुखद अनुभव होता है लेकिन दिल के किसी कोने में ये अफसोस है कि संगीत को प्रोफेशन नहीं बना पाया. बचपन में सोचा था संगीत को ही जीवन में आगे प्रोफेशन के तौर पर बढ़ाऊगा लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. घुड़सवारी का भी काफी शौक था, लेकिन समय के साथ सब कुछ छूट गया.

संगीत और उर्दू मेरे डीएनए का हिस्सा

डॉ. अजीत प्रधान अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि मेरा बचपन संगीत और उर्दू के बीच ही गुजरा था. पटना में पैतृक घर में दादा बृज कुमार सहाय हर पखवाड़े एक कवि, उर्दू फारसी के संगीतकार की बैठक आयोजित करते थे. इस बैठक ने मुझे उस्ताद फैयाज, बेगम अख्तर के संगीत से मिलवाया. वहीं, मां राधा प्रधान ने चैती से मिलवाया. जिस वजह से संगीत और उर्दू के साथ ही बचपन बीता और बड़ा हुआ.

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संगीत के साथ ली सरोद और तबले की तालीम

डॉ. अजीत प्रधान ने बताया कि उन्होंने पंडित बिंदा प्रसाद गौंड और पंडित बृज नारायण से सरोद सीखने के साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की यात्रा शुरू की, जो आज तक अनावरत जारी है. इस दौरान फिलीपींस, यूनाइटेड किंगडम और आस्ट्रेलिया में काम के दौरान पटना और संगीत की याद सताती रही और वापस आकर यहां संगीत के साथ सर्जरी का जो दौर शुरू हुआ वो आज तक जारी है.

 

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