कोरोना वैक्सीनेशन तेज लेकिन 60% लोगों में ही क्यों बन रही एंटीबॉडी, जानें कारण

Smart News Team, Last updated: Wed, 19th May 2021, 10:50 AM IST
  • कोरोना के खिलाफ जंग के लिए वैक्सीनेशन का काम तेजी से करने का प्रयास किया जा रहा है. ऐसे में रिसर्च के अनुसार माना जाए तो सिर्फ 60 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बन रही है और कुछ लोगों में बिल्कुल ही एंटीबॉडी का निर्माण नहीं हो रहा है.
कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद सिर्फ 60 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बन रही है.

पटना. कोरोना वैक्सीनेशन का काम जोर-शोर पर चल रहा है. वहीं बता दें कि कोविड से बचने के लिए यह टीका सिर्फ 60 फीसदी लोगों में ही एंटी बॉडी का निर्माण कर रहा है. बचे 40 फीसदी लोगों में दूसरी डोद लेने के 14 दिन बाद एंटी बॉडी बन रही है. पटना एम्स में इलाज के लिए आने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों की रिपोर्ट के आधार पर तथ्य सामने आए हैं. पटना एम्स में कोरोना संक्रमित 100-100 मरीजों की एंटी बॉडी को अलग-अलग कर उनका अध्ययन करने में विशेषज्ञ जुटे हैं.

पटना एम्स ब्लड बैंक प्रभारी सह शोधकर्ता डॉ. नेहा सिंह का कहना है कि कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद संक्रमित हुए कोरोना मरीजों और सामान्य कोरोना मरीजों के शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी के बनने को लेकर अध्ययन किया जा रहा है. रिसर्च में सामने आया है कि कोरोना वैक्सीन लेने के बाद सभी संक्रमितों में एक सामान एंटीबॉडी नहीं बन रही है. वहीं कई लोगों में एंटीबॉडी का निर्माण बिल्कुल नहीं हो रहा है. 

रिसर्च में सामने आ रहे तथ्यों पर डॉ. नेहा सिंह का कहना है कि हर व्यक्ति के इम्यून सिस्टम अलग होने पर यह परेशानी देखने को मिल रही है. उका कहना है कि हर व्यक्ति के पारिवारिक जीन के अंतर से भी यह प्रभावित है. 

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उदाहरण बताते हुए डॉ. नेहा ने कहा कि एक परिवार पर कोरोना संक्रमण का माइल्ड असर हो रहा है और वह दवा के सेवन पर जल्दी ठीक हो रहे हैं. वहीं एक ऐसा परिवार जहां कोरोना संक्रमण के कारण एक या एक से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है. ऐसे में शरीर के इम्यून सिस्टम और एंटी बॉडी बनने की प्रक्रिया प्रभावित होने को मिलीत है.

पटना एम्स में शोधकर्ता डॉ. नेहा शर्मा का कहना है कि 14 से 42 दिनों में एंटीबॉडी का निर्माण होता है. कोरोना वैक्सीन इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर देती है. जिससे शरीर कोरोना वायरस का हमला होने पर उससे लड़ता है. वहीं जिनमें एंटीबॉडी नहीं बन रही है उन्हें सुरक्षा का खास ध्यान रखना होगा. 

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एनएमसीएच में कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. अजय का कहना है कि यह सच है कि कई लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटी बॉडी नहीं बन रही है. कोरोना संख्रमित में चार तरह से एंटीबॉडी बनती है. जिसमें स्पाइक प्रोटीन एंटी बॉडी प्रमुख है जो सुरक्षात्मक है. यह देखना होगा कि जिन्हें एंटी बॉडी बन रही है उनमें क्या सुरक्षात्मक बन रही है या नहीं. यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण है. 

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