सोना देने के इनाम में इंदिरा गांधी ने खेदारू मियां को दी थी 20 एकड़ जमीन, 40 साल से नहीं मिला कब्जा

Shubham Bajpai, Last updated: Tue, 7th Sep 2021, 9:26 AM IST
  • बगहा के खेदारू मियां ने आज से 40 साल पहले ईमानदारी दिखा गढ़े सोने को सरकार को सौंप दिया. जिस पर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 20 एकड़ जमीन बतौर इनाम दी थी. इस जमीन में कब्जे के लिए खेदारू 40 साल तक विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें जमीन नहीं मिली. अब जमीन की आस में ही उनकी मौत हो गई.
सोना देने के इनाम में इंदिरा गांधी ने खेदारू मियां को दी थी 20 एकड़ जमीन, 40 साल से नहीं मिला कब्जा

पटना. आज से 40 साल पहले बगहा के गोड़िया पट्टी की खेदारू नाम के युवक को अपनी दुकान के पीछे एक सोने की गगरी मिली, जिसमें करीब 10 किलो सोना था. खेदारू ने ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए उसे सरकार को सौंप दिया, जिस पर उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खेदारू को 20 एकड़ जमीन बतौर इनाम दी थी. इस जमीन में कब्जा लेने के लिए उस वक्त शुरू हुई दौड़ खेदारू की मौत के बाद खत्म हुई. 40 साल से जमीन की आस में विभागों के चक्कर काट रहे खेदारू को आज तक जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका.

सोने मिलने के बाद इंदिरा को देने गए थे दिल्ली

खेदारू की इलाके में उस वक्त परचून की दुकान थी, जिसके पीछे खुदाई में उनको सोने की एक गगरी मिली थी. जिसे उन्होंने ईमानदारी दिखाकर प्रशासन को देने का फैसला किया, लेकिन उनकी जिद्द थी कि ये गगरी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपने हाथों से देंगे, जिसके बाद व्यवस्था बनाई गई और वो दिल्ली जाकर तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी को गगरी सौंप कर आए. उनकी ईमानदारी से खुश होकर इंदिरा ने उन्हें 20 एकड़ जमीन दी थी.

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पहले अतिक्रमण फिर जंगल की जमीन बता लौटाया

खेदारू के परिजनों ने बताया कि पट्टा मिलने के बाद जब गांव वापस आए और जमीन के लिए विभाग पहुंचे तो पहले इस जमीन में अतिक्रमण की बात कही गई. इसके बाद इस जमीन को जंगल की बताकर लौटा दिया.

सब बन गए मजदूर जमीन को नहीं कोई पता

खेदरू की पत्नी हदीसन खातून ने कहा कि जब गगरी मिली थी तो उसे हमने तो उसे रखने को कहा था, लेकिन उन्होंने ईमानदारी के चलते गगरी इंदिरा गांधी को सौंप दी. जिसके बाद में ईमान में जमीन मिली उसका आज तक कोई पता नहीं है. वो कहते थे कि बच्चों को पढ़ाकर अफसर बनाएंगे, लेकिन गरीबी की वजह से स मजदूर बन गए.

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