पढ़ाई के लिए मां ने डांटा तो छात्रा ने दे दी जान

Malay, Last updated: 22/01/2020 10:28 AM IST
पढ़ाई में कमजोर इंटरमीडिएट की छात्रा को डांटना महंगा पड़ा। वह अवसाद में थी और सोमवार की रात फंदे से लटक गई। मंगलवार को घटना की जानकारी मिलते ही कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में...
सोमवार की रात पीरबहोर थाना क्षेत्र में हुई घटना

पढ़ाई में कमजोर इंटरमीडिएट की छात्रा को डांटना महंगा पड़ा। वह अवसाद में थी और सोमवार की रात फंदे से लटक गई। मंगलवार को घटना की जानकारी मिलते ही कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पीरबहोर थानाध्यक्ष का कहना है कि मृतका अवसाद में थी और यही उसकी आत्महत्या का कारण बन गया।

पढ़ाई से नहीं थी संतुष्ट 
पीरबहोर थाना क्षेत्र के महेंद्रू में रहने वाली 17 साल की आर्या इंटरमीडिएट की पढ़ाई से संतुष्ट नहीं थी। बताया जा रहा है कि घर वाले पढ़ाई को लेकर उसे हमेशा सुझाव देते थे। कुछ दिन पहले घर वालों ने पढ़ाई को लेकर डांटा था। सूत्रों की मानें तो वह अवसाद में थी और सोमवार की रात कमरे में साड़ी के सहारे फंदे पर लटक गई। सूत्रों की मानें तो घर वाले से मोबाइल को लेकर भी कुछ विवाद हुआ था। 

पुलिस ने की छानबीन 
घटना की जानकारी मिलते ही मंगलवार की सुबह पुलिस मौके पर पहुंच गई और छानबीन में जुट गई। आस पास के लोगों के साथ घर वालों का भी पुलिस ने बयान दर्ज किया है। पुलिस की मानें तो छात्रा की मां पढ़ाई को लेकर गंभीर थी और हमेशा उस पर दबाव बना रही थी। पुलिस का कहना है कि घर वालों के मुताबिक रात में सब कुछ सही था। मां ने पढ़ाई के लिए डांटा था, जो उसे नागवार गुजरी। इसके बाद वह अपने कमरे में सोने गई और छत पर लगी हुक से साड़ी फंसाकर लटक गई। पीएमसीएच के टीओपी प्रभारी अमित का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद घर वालों को सौंप दिया गया है। परिजनों ने बयान में पढ़ाई में कमजोर होने की बात कही है।  

छात्रों में बढ़ रहा है अवसाद 
मनोवैज्ञानिक मीनाक्षी भट्ट का कहना है कि छात्रों में तेजी से अवसाद की समस्या बढ़ रही है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों से लेकर पढ़ाई करने वाले भी अवसाद में हैं। ऐसे बच्चों को स्वच्छ माहौल देना होगा। असफलता में भी सफलता का रास्ता खोजना होगा। परिवार को ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देना होता है और डांट-फटकार के बजाए उन्हें प्यार से रास्ते पर लाना होता है। कोई छात्र बार-बार असफलता की बात करे या फिर मरने की बात करे तो उसकी समय से काउंसलिंग करानी चाहिए। ऐसे बच्चों के प्रति परिवार वालों की जिम्मेदारी कुछ अधिक बढ़ जाती है। शहर में बढ़ रहीं सुसाइड की घटनाओं से सभी को सबक लेना चाहिए।  

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