एक डॉक्टर के भरोसे 22 हजार लोग

Malay, Last updated: Wed, 22nd May 2019, 8:30 AM IST
अगर आप पटना जिले के किसी गांव में रहते हैं तो आपको इलाज मिलना बहुत मुश्किल है। ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्षों से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हंै। मरीज दर-दर भटक रहे हैं। जिन सरकारी...
प्रतीकात्मक तस्वीर

अगर आप पटना जिले के किसी गांव में रहते हैं तो आपको इलाज मिलना बहुत मुश्किल है। ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वर्षों से डॉक्टरों के पद खाली पड़े हंै। मरीज दर-दर भटक रहे हैं। जिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर हैं, वहां मरीजों की लंबी कतार लग रही है। पटना जिले में 22 हजार लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर तैनात है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के मुताबिक एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। शहरों में स्थिति फिर भी थोड़ी बेहतर है पर गांवों में तो हर दूसरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टर के बिना ही चल रहा है।

42 पदों पर सिर्फ 12 डॉक्टर तैनात
शहर हो या गांव, अधिकतर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ मरीजों को रेफर करने के काम आ रहे हैं। पटना शहर में 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या 23 है। 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों के 561 पद हैं, जबकि यहां सिर्फ 267 डॉक्टर ही तैनात हैं। शहर में 42 डॉक्टरों की जगह पर सिर्फ 12 डॉक्टर ही हैं। 

10 साल में खुल गए 200 निजी अस्पताल
पटना जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार केंद्रों की चरमराती व्यवस्था का लाभ निजी अस्पतालों को हुआ। पिछले 10 साल में सबसे तेजी से स्वास्थ्य क्षेत्र में ही निजीकरण हुआ। यहां 200 से अधिक नर्सिंग होम और क्लीनिक खुल गए। सरकारी अस्पतालों में दलालों ने जगह बना ली। स्थिति यह हो चुकी है कि गरीब को खांसी-जुकाम जैसी बीमारी के लिए हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। वर्ष 2018 में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक आम भारतीयों की पहुंच आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक हो नहीं पा रही है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने के लिए गरीब अपनी आय का 10 प्रतिशत से अधिक इलाज पर खर्च कर रहे हैं। 

सरकारी सेवा से मोहभंग
जब इन रिक्त पदों की सच्चाई निकालने के लिए कुछ डॉक्टरों से बात की गई तो उनका कहना था कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टरों के मोह भंग के कारण पद रिक्त होते जा रहे हैं। डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में न तो प्राइवेट की तुलना में पैसा मिल पाता है और न ही सुविधाएं। यही कारण है कि सरकार बहाली करती है लेकिन डॉक्टर छोड़ जाते हैं। नए डॉक्टर तो पढ़ाई के कारण भी सरकारी अस्पतालों से त्यागपत्र दे रहे हैं। 

267 डॉक्टरों के जिम्मे 60 लाख की सेहत 
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पटना जिले की आबादी 58,38,465 है। वर्तमान में यह 60 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। इतनी बड़ी आबादी की सेहत 267 डॉक्टरों के भरोसे है। पीएचसी पर तैनात कुछ डॉक्टर पटना में निजी क्लीनिक चला रहे हैं तो कुछ बड़े अस्पतालों में सेवा दे रहे हैं।

पद के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती कम है। पीजी की पढ़ाई के कारण भी कई डॉक्टरों ने त्यागपत्र दे दिया है। आचार संहिता खत्म होने के बाद इस समस्या के समाधान का प्रयास किया जाएगा।  
- डॉ राज किशोर चौधरी, सिविल सर्जन, पटना 

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