कबाड़ वाहन को बना दे रहे एम्बुलेंस

Malay, Last updated: 19/11/2019 01:20 AM IST
डॉ वशिष्ठ नरायण की मौत के बाद चर्चा में आए पटना के एम्बुलेंस में बड़ी कहानी छिपी है। कबाड़ वाहनों को एम्बुलेंस बनाकर बड़ा खेल किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस की कमी है तो निजी...
मारुति वैन को एंबुलेंस बनवाता एक व्यक्ति।

डॉ वशिष्ठ नरायण की मौत के बाद चर्चा में आए पटना के एम्बुलेंस में बड़ी कहानी छिपी है। कबाड़ वाहनों को एम्बुलेंस बनाकर बड़ा खेल किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस की कमी है तो निजी एम्बुलेंस मनमानी वसूली के साथ नियम भी तोड़ रहे हैं। पटना में अधिकतर एम्बुलेंस हें जो परिवहन विभाग से पास ही नहीं है और मरीजों की जान से खेल रहे हैं। मरीजों को लेकर दौड़ती एम्बुलेंस को पुलिस चेक नहीं कर पाती है। पटना और आस पास के क्षेत्र में दौड़ रही एम्बुलेंस में पचास प्रतशत प्राइवेट वाहन में
रजिस्टर्ड हैं।

दस हजार में हो जाता है खेल

कोई भी पुरानी गाड़ी हो इसे दस हजार रुपए के खर्च में एम्बुलेंस बना दिया जाता है। इसमें सबसे अधिक वैन, बंद जीप का इस्तेमाल किया जा रहा है। पटना मेडिकल कॉलेज में जब इसकी पड़ताल की गई और नंबर से जांचा गया तो दर्जन एम्बुलेंस ऐसे मिले जो  एम्बुलेंस में पस ही नही है। पटना के शगुना मोड़ और दानापुर के साथ कई क्षेत्र ऐसे हें जहां गैरज में वाहनों को एम्बुलेंस बनाने का काम किया जाता है।

ऐसे शुरू हुई पड़ताल

डॉ वशिष्ठ नरायण की मौत के बाद एम्बुलेंस नहीं मिलने का मामला सामने आने के बाद जब हिन्दुस्तान स्मार्ट ने पड़ताल की तो एक के बाद एक खुलासा सामने आया। मरीजों से मजबूरी का सौदा करने के बाद अब नया खुलासा बिना रजिस्टर्ड एम्बुलेंस का है। रिपोर्टर पटना के कई गैरजों में गया और जब पड़ताल किया तो दस हजार में वैन को एम्बुलेंस बनाने का सौदा पक्का हो गया। गैरेज में बताया गया कि दस हजार रुपए में अंदर की सीट निकालकर पूरी व्यवस्था बना दी जाएगी। गैरेज में डेंटर ने ऐसे दिया जवाब।

रिपोर्टर - मेरे पास दो पुरानी वैन है उसे एम्बुलेंस बनवाना था?
डेंटर - बन जाएगा, लेकिन पास होगा कि नहीं यह आप जाने।

रिपोर्टर - लोग बनवा रहे हैं या नहीं?
डेंटर - बहुत गाड़ियां आती हैं, दो दिन में बन जाती है।

रिपोर्टर - उनकी गाड़ी कैसे पास होती है एम्बुलेंस?
डेंटर - पास कहां होती है सब ऐसे ही चला रहे हैं, एम्बुलेंस को रोकेगा कौन?

रिपोर्टर - कितना लगेगा पूरा बनाने में?
डेंटर - दस हजार रुपया दे दीजिएगा इसकमें डेंट पेंट होगा, स्ट्रैक्चर आप लगा लीजिएगा।

जब हुई जांच खुल गई पोल

जब भी जांच हुई है एम्बुलेंस के फर्जीवाड़े की पोल खुली है। गांधी मैदान ट्रैफिक थाना में दो एम्बुलेंस पकड़ी गई है। पुलिस के आकड़ों की बात करें तो पटना में जब भी चेकिंग अभियान चला है और एम्बुलेंस को चेक किया गया तो खामियां उजागर हुई हैं। कई बार एम्बुलेंस से दुर्घटना के बाद भी बड़ा राज खुला है।
 

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