कंगना घाट पर नया गुरुद्वारा: पटना साहिब में आस्था का एक और केंद्र

Malay, Last updated: 23/11/2019 12:44 AM IST
सिख संप्रदाय के लिए आस्था का केंद्र माने जाने वाले पटना साहिब में एक और गुरुद्वारा बन रहा है। कंगन घाट पर इस नये गुरुद्वारे का निर्माण कराया जा रहा है। तख्त श्रीहरिमंदिरजी प्रबंधक कमेटी के द्वारा कार...
गुरुघर में मत्था टेकने आने वाले श्रद्धालु कंगन घाट घूमने जरूर आते हैं। यहां दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। पर्यटन विभाग की ओर से घाट पर सीढ़ियां व चबुतरे का भी निर्माण कराया गया है। यह पर्यटन का

सिख संप्रदाय के लिए आस्था का केंद्र माने जाने वाले पटना साहिब में एक और गुरुद्वारा बन रहा है। कंगन घाट पर इस नये गुरुद्वारे का निर्माण कराया जा रहा है। तख्त श्रीहरिमंदिरजी प्रबंधक कमेटी के द्वारा कार सेवा वाले संतों के सहयोग से गुरुद्वारे का निर्माण किया जा रहा है, जो लगभग बनकर तैयार है। गुरु गोविंद सिंह जी क्रीड़ा स्थली कंगन घाट पर सफेद पत्थरों से बन रहा गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र होगा। इसके पास ही पर्यटन सुविधा केन्द्र भी है। टीएफसी व गुरुद्वारे का निर्माण और गंगा तट का विकास होने से कंगन घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गयी है।

आपको बता दें कि सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब है। सिखों के आखिरी गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था। यही नहीं, सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं। इस कारण देश-दुनिया के सिख संप्रदाय के लिए पटना साहिब आस्था का बड़ा केंद्र रहा है। तख्त हरिमन्दिर साहिब, गुरुद्वारा बंगला साहिब, सीस गंज गुरुद्वारा, हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा, फतेहगढ़ साहिब, हजूर साहिब, पावंटा साहिब, गुरुद्वारा श्री दमदमा साहिब और तख्त पटना साहिब देश के दस ऐसे गुरुद्वारे हैं, जहां मत्था टेकने की लालसा हर किसी की होती है। आपको बता दें कि सिक्ख धर्म के इतिहास का पहला गुरुद्वारा इस धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी ने बनाया था। उन्होंने पहली बार गुरुद्वारा करतारपुर में बनाया था।

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