पटना

प्राइमरी में बिडेन का दावा मजबूत

Malay, Last updated: 14/03/2020 05:40 PM IST
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारी की होड़ में जुटे पूर्व उप राष्ट्रपति जो बिडेन ने इडाहो स्टेट के लिए हुए प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल कर ली है। अब तक बिडेन के 670 डेलिगेट्स...
उप राष्ट्रपति जो बिडेन

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवारी की होड़ में जुटे पूर्व उप राष्ट्रपति जो बिडेन ने इडाहो स्टेट के लिए हुए प्राइमरी चुनाव में जीत हासिल कर ली है। अब तक बिडेन के 670 डेलिगेट्स जीत चुके हैं। वहीं, बर्नी के 574 डेलिगेट्स को सफलता मिली है। बिडेन ने अभी तक 24 स्टेट में से 15 में जीत हासिल कर ली है। इस सुपर ट्यूजडे को 6 स्टेट के लिए चुनाव हुए थे। इनमें इडाहो, मिशिगन, मिसोरी और मिसीसिपी के प्राइमरी चुनाव में बर्नीं के डेलिगेट्स को हार मिली।

मुख्य रूप से बिडेन और बर्नी सैंडर्स के बीच मुकाबला है। डेमोक्रेटिक पार्टी में कुल 3979 डेलीगेट्स हैं और पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पाने के लिए 1991 डेलीगेट्स का समर्थन पाना जरूरी है। बिडेन को अब 1321 डेलिगेट्स और बर्नी को 1417 डेलिगेट्स की जरूरत है। अगले सुपर ट्यूजडे पर अन्य राज्यों में प्राइमरी चुनाव कराए जाएंगे। अगर इसके बाद भी किसी प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट के 1991 डेलिगेट्स को जीत नहीं मिलती है, तो इसके लिए दूसरी चुनाव प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दरअसल अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव भारत से कई मायनों में अलग होते हैं या यूं कहें कि दोनों में जमीन आसमान का फर्क होता है। इन चुनावों में प्रत्याशी बनने के लिए किसी पार्टी के उम्मीदवारों में ही कई चरणों में चुनाव होते हैं और परिणामस्वरूप किसी एक का नाम आखिर में तय होता है। जैसे कि अमेरिका में इस समय रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी आमने सामने हैं परन्तु डेमोक्रेटिक की ओर से टिकट के लिए जो बिडेन और बर्नी आगे चल रहे हैं।

प्राइमरी चुनाव होते हैं अहम 
'प्राइमरी' चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली सीढ़ी है। विभिन्न राज्यों में प्राइमरी चुनाव के जरिए पार्टियां अपने प्रबल दावेदार का पता लगाती हैं। यह प्रक्रिया दो तरीकों से होती है।

प्राइमरी
ये तरीका ज्यादा परंपरागत है. ज्यादातर राज्यों में इसका इस्तेमाल होता है. इसमें आम नागरिक हिस्सा लेते हैं और पार्टी को बताते हैं कि उनकी पसंद का उम्मीदवार कौन है।

कॉकस
इस प्रक्रिया का इस्तेमाल उन राज्यों में होता है जहां पर पार्टी का गढ़ होता है. कॉकस में ज्यादातर पार्टी के पारंपरिक वोटर ही हिस्सा लेते हैं. इस बार लोवा राज्य में कॉकस तरीका अपनाया जाएगा। दरअसल, इन दोनों चुनावों में सबसे बड़ा अंतर यह होता है कि कॉकस में पार्टी के सदस्य जमा होते हैं। सार्वजनिक स्थल पर उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जाती है, इसके बाद वहां मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार चुनते हैं। वहीं प्राइमरी में बैलट के जरिए वोटिंग होती है।

नेशनल कन्वेंशन 
जो प्रतिनिधि प्राइमरी में चुने जाते हैं, वे चुनाव के दूसरे चरण यानी कन्वेंशन में शामिल होते हैं। कन्वेंशन में ये प्रतिनिधि पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चुनाव करते हैं। इसी दौर में नामांकन की प्रक्रिया होती है। इस साल रिपब्लिकन पार्टी का कन्वेंशन 18 से 21 जुलाई और डेमोक्रेटिक पार्टी का 25 जुलाई को आयोजित किया जाएगा।

चुनाव प्रचार के जरिए जुटाया जाता है समर्थन
तीसरे चरण में चुनाव प्रचार होता है। इसमें अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर कई मुद्दों को लेकर बहस होती है। आखिरी हफ्ते में उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत लगा कर ‘स्विंग स्टेट्स’ को लुभाने में झोंक देते हैं। स्विंग स्टेट्स वह राज्य होते हैं जहां का मतदाता किसी के भी पक्ष में मतदान कर सकता है।

अन्य खबरें