सावधान! जानलेवा हो सकता है टिटनेस

Malay, Last updated: 05/12/2019 11:00 PM IST
टिटनेस का संबंध चोट लगने या कटने से है। चोट लगने या कटने के बाद संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है। टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगवाया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। टिटनेस होने का असली कारण है...
प्रतीकात्मक तस्वीर

टिटनेस का संबंध चोट लगने या कटने से है। चोट लगने या कटने के बाद संक्रमण पूरे शरीर में फैल जाता है। टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगवाया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। टिटनेस होने का असली कारण है ‘क्लोसट्रिडियम टेटानी’ नामक बैक्टीरिया। यह बैक्टीरिया गंदगी और जंग लगी चीजों में पाया जाता है। जब शरीर का घाव किसी कारण से इस बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो यह संक्रमण कर देता है। संक्रमण के बढ़ने पर पहले जबड़े की मांसपेशियों में ऐंठन आती है। इसके बाद निगलने में कठिनाई होने लगती है और फिर यह संक्रमण पूरे शरीर की मांसपेशियों में जकड़न और ऐंठन पैदा कर देता है। इसलिए कहा जाता है कि जब भी आप कहीं गिर जाएं, शरीर के किसी भी हिस्से में खरोंच आ जाए या कोई लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लग जाए या चुभ जाए तो तुरंत टिटनेस का इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए। 

जरूरी है टीका लगवाना
टिटनेस का सीधा असर हमारे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है। गर्भावस्था में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर मां को टिटनेस हो गया तो इसका सीधा असर बच्चे पर भी पड़ता है। मां के टीकाकरण से गर्भ में पल रहा बच्चा भी सुरक्षित हो जाता है। इससे बच्चा गर्भ में तो सुरक्षित रहता ही है, जन्म के कुछ समय बाद तक सुरक्षित रहता है। 

टिटनेस के प्रकार 
स्थानीय (लोकल) टिटनेस 
इसमें रोगी को चोट (घाव) की जगह पर लगातार ऐंठन होती है। यह ऐंठन बंद होने में हफ्ते से अधिक का समय ले लेती है। हालांकि टिटनेस का यह प्रकार मात्र एक प्रतिशत रोगियों में ही घातक होता है।

कैफेलिक टिटनेस 
कैफेलिक टिटनेस प्राय: ओटाइटिस मीडिया (कान के संक्रमण का एक प्रकार) के साथ होता है। यह सिर पर लगने वाली किसी चोट के बाद होता है। इसमें खासतौर पर मुंह का भाग प्रभावित होता है।

जेनरलाइज्ड टिटनेस 
जेनरलाइज्ड टिटनेस सबसे ज्यादा होने वाला टिटनेस है। टिटनेस के कुल मामलों में से 80 प्रतिशत रोगियों को यह टिटेनस ही होता है। इसका असर सिर से शुरू होकर शरीर के निचले हिस्से में आ जाता है। इसका पहला लक्षण ट्रिसमस या जबड़े का बंद हो जाना है। अन्य लक्षणों के तौर पर मुंह की मांसपेशियों में जकड़न होती है। इसके बाद गर्दन में ऐंठन, निगलने में तकलीफ, छाती और पिंडलियों की मांसपेशियों में जकड़न होती है। इसके कुछ अन्य लक्षणों में बुखार, पसीना, ब्लडप्रेशर बढ़ना और ऐंठन आने पर हृदय गति बढ़ना आदि शामिल हैं।

शिशुओं में टिटनेस 
उन नवजात शिशुओं में टिटनेस का खतरा होता है, जिन्हें गर्भ में रहते समय मां से पैसिव इम्यूनिटी नहीं मिलती या जब गर्भवती का टीकाकरण ठीक से नहीं होता। आमतौर पर यह नाभि का घाव ठीक से न सूखने के कारण होता है। 

क्या हैं लक्षण
- आमतौर पर रोग के लक्षण प्रकट होने में आठ दिन लगते हैं, लेकिन ये समय 3 दिनों से लेकर 3 सप्ताह तक का हो सकता है - शरीर में दर्द और मांसपेशियों में जकड़न भी इसका एक लक्षण है ’ यदि आपको बार-बार पेशाब जाना पड़ता है तो यह भी एक लक्षण है 
- टिटनेस से संक्रमित मरीज की हड्डियों के फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ जाती है ’  यदि आप इसरोग को नजरअंदाज करते हैं तो जबड़े भी जाम हो सकते हैं 
- टिटनेस से संक्रमित मरीजों को बहुत ज्यादा पसीना आता है 
- निगलने में कठिनाई होती है 
- उच्च रक्तचाप और हृदय गति तेज हो जाती है 
- दम घुटना आखिरी स्टेज होती है, जो आगे चलकर श्वसन प्रणाली को फेल कर देती है।  

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