69 करोड़ बहाकर भी साफ पानी नसीब नहीं

Malay, Last updated: 19/11/2019 01:12 AM IST
स्वच्छ पेयजल के लिए पिछले तीन वर्षों में 69.45 करोड़ रुपए नगर निगम ने बहा दिए, फिर भी पटनावासियों को पीने लायक पानी नहीं मिल रहा है। स्वच्छ पानी मिले भी तो कैसे, कहीं नालों के पानी के बीच सबमर्सिबल...
पानी टंकी।

स्वच्छ पेयजल के लिए पिछले तीन वर्षों में 69.45 करोड़ रुपए नगर निगम ने बहा दिए, फिर भी पटनावासियों को पीने लायक पानी नहीं मिल रहा है। स्वच्छ पानी मिले भी तो कैसे, कहीं नालों के पानी के बीच सबमर्सिबल बोरिंग स्थापित कर दी गई तो कई जगह सालभर भी बोरिंग नहीं चल पाई। अब भारतीय मानक ब्यूरो की रिपोर्ट आई तो खलबली मची है।  हिन्दुस्तान स्मार्ट ने वार्डों
में इसकी पड़ताल की तो निगम की लापरवाही उजागर हुई।

राजीवनगर रोड नंबर-24 के अंतिम छोर पर वर्ष 2016 में सबमर्सिबल बोरिंग की स्थापना की गई थी। मंशा थी कि कम से कम इस सबमर्सिबल से यहां के बाशिंदों को स्वच्छ पेयजल मिल सकेगा। परंतु यह सपना पूरा नहीं हुआ। कुछ माह ही चलने के बाद यह सबमर्सिबल शोपीस बनकर रह गया है। मोटर जल चुका है। अब यह किसी काम का नहीं है। गौर करने वाली बात यह भी है कि यह बोरिंग ऐसी जगह की गई है, जहां पूरे मोहल्ले का गंदा पानी जमा होता है। ऐसे में स्वच्छ जल का सपना देखना बेमानी ही है।

इसी तरह, वार्ड नंबर 25 में मंदिरी नाले के ठीक बगल में वर्ष 2016 में सबमर्सिबल बोरिंग कराई गई थी। बमुश्किल यह एक वर्ष ही चल पाई। यहां पानी की टंकी अब भी दिखती जरूर है, पर लाभ नहीं है। यही पास में हैंडपंप है। उसी हैंडपंप से आसपास के लोगों का गुजारा हो रहा है। ये तो बानगी भर है। शहर के विभिन्न हिस्सों में हालात इससे अलग नहीं हैं। कहीं मोटर जल गयी है तो कहीं बोरिंग ही सूख गई है।

जलमीनार से भी लाभ नहीं मिला
वर्ष 2012 में बुडको ने शहर के हर वार्ड में जलमीनार बनाने की शुरुआत की थी। 17 वार्डों में जलमीनार का निर्माण हुआ भी, शेष में जमीन नहीं मिलने का हवाला दिया गया। यह योजना भी फाइलों में ही धूल फांकती रह गई और स्वच्छ पानी का सपना टूट गया।

पाइपलाइन विस्तार की कवायद
जलमीनार बनाने की योजना जब पूरी नहीं हुई तो पाइपलाइन विस्तार पर बात शुरू हुई। पर यह भी परवान नहीं चढ़ सकी। अब मुख्यमंत्री सात निश्चय की हर घर नल-जल योजना के तहत वार्डों में पाइपलाइन विस्तार की कवायद चल रही है।

राजधानी में तीन वर्ष पहले स्थापित सबमर्सिबल बोरिंग के  दो वर्षों तक रख-रखाव का प्रावधान था।  2017 में चापाकल और बोरिंग के रख-रखाव के लिए
50 हजार रुपए दिए गए थे।
-सुधाकर सिंह, कार्यपालक अभियंता, पाटलिपुत्र अंचल
 

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