हाईकोर्ट ने अफसरों को कसा: चीफ जस्टिस की दो टूक- कहानियां मत सुनाइए, जमीनी हकीकत बताइए

Malay, Last updated: 28/07/2019 07:51 AM IST
राजधानी होने के बावजूद पटना में जहां नजर डालिए समस्याओं का अंबार है। इन्हीं जनसमस्याओं को लेकर अब हाईकोर्ट सख्त हुआ है। अभूतपूर्व मामले में शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद एक साथ कई अफसरों को...
पटना हाईकोर्ट

राजधानी होने के बावजूद पटना में जहां नजर डालिए समस्याओं का अंबार है। इन्हीं जनसमस्याओं को लेकर अब हाईकोर्ट सख्त हुआ है। अभूतपूर्व मामले में शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद एक साथ कई अफसरों को हाईकोर्ट में बुला लिया गया। चीफ जस्टिस ने जब सवाल पूछने शुरू किए तो सभी एक-दूसरे को देखने लगे। इस पर अदालत ने उन्हें दो टूक कहा- कहानियां मत सुनाइए, जमीनी हकीकत बताइए। आखिर पटना में बदलाव कब होगा? 

पटना में कब कौन आपकी गाड़ी के सामने आ जाए, पता नहीं। जाम पर कोई लगाम ही नहीं है। अतिक्रमण खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। डे्रनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है। जलजमाव से हर साल लोग परेशान होते हैं। आखिर सरकारी मशीनरी क्या काम कर रही है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हाईकोर्ट ने शनिवार को छुट्टी के दिन जन सुविधाओं से जुड़े विभागों के सभी अफसरों को विशेष अदालत में बुला लिया। सुबह 10:39 बजे अदालत शुरू हुई। कोर्ट विभाग के अधिकारियों को कर्मचारियों से खचाखच भरा हुआ था। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एपी शाही तथा न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने एक-एक कर सवाल पूछने शुरू किए तो अधिकारी जवाब देने में अटकने लगे। सुनवाई दो बजे तक लगातार चलती रही। पसीने से लथपथ अधिकारियों के जवाबों से न्यायमूर्ति संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने एक बार फिर पूरी तैयारी के साथ 31 अगस्त को अधिकारियों को बुलाया है। यह पहली बार है, जब  जनसमस्याओं के निस्तारण के लिए हाईकोर्ट इतने अधिकारियों को एक साथ तलब किया है।

कोर्ट के पांच बड़े निर्देश
1- योजना लागू करने में तकनीकी विशेषज्ञ को शामिल करेंं
2- ट्रैफिक लाइट के ऊपर डिजिटल टाइमर लगाया जाए
3- राज्य सरकार को  एक समन्वय समिति बनानी चाहिए
4- समिति में नौकरशाह के अलावा तकनीकी विशेषज्ञ खासकर टाउन प्लानर जरूर रखा जाए
5- विभागों में आपसी सामंजस्य होना चाहिए। सरकार को अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

चीफ जस्टिस के सवाल
- सड़क पर गाड़ी लगाकर सामान खरीदने वालों पर जुर्माना क्यों नहीं लगता? 
- अतिक्रमण फिर से कैसे हो जाता है? क्या कभी कारणों का अध्ययन किया गया है?   
- किस प्लॉट पर वेंडिंग जोन बनेंगे, कितने वेंडरों को दुकान लगाने का मौका मिलेगा, कोई अध्ययन है?

अफसरों के बेतुके जवाब
- गृह सचिव : जाम की समस्या के लिए डीएम, एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं। 
- डीएम : 16 प्रमुख सड़कों को चिह्नित किया गया है, जहां अतिक्रमण होता है। दो टीमें लगाई गई हैं।  
- नगर आयुक्त : नहीं, अभी वेंडिंग जोन बनाने का निर्णय लिया गया है। इसलिए जमीन चिह्नित नहीं हो सकी है। 

हवा में बनाएंगे वेंडिंग जोन
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि कहां वेंडिंग जोन बन रहे हैं तो नगर आयुक्त ने कहा- 75 वार्डों में। प्रस्तावित स्थलों की सूची कहां है? इस पर जवाब दिया कि दीघा घाट में। प्लाट नंबर, खसरा नंबर बताइए? निगम की जमीन पर बनेगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा- जब आपको जमीन की वास्तविक जानकारी नहीं है तो क्या हवा में वेंडिंग जाने बनाएंगे। 

अधिकारी पहुंचे
गृह विभाग, शहरी विकास और आवास विभाग, राजस्व और भूमि सुधार विभाग, सड़क निर्माण विभाग, पीएचईडी के प्रधान सचिव सहित विधि विभाग के सचिव, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष, डीआईजी, एसएसपी, ट्रैफिक एसपी के अलावा कई अधिकारी टीम के साथ कोर्ट में मौजूद थे।

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