दरकतीं हथकड़ियों की गुम होती हेकड़ी

Malay, Last updated: 14/07/2019 09:10 AM IST
पटना में अपराधियों के भीतर हथकड़ी की हेकड़ी खत्म होती जा रही है। पुलिस के पास इतनी हथकड़ियां ही नहीं बची हैं कि वे सभी अपराधियों को हथकड़ी पहना सकें। हर थाने में 2-3 हथकड़ियां ही बची हैं, जबकि रोज 5-10...
दो-तीन हथकड़ियों के भरोसे चल रहा पटना का हर थाना

पटना में अपराधियों के भीतर हथकड़ी की हेकड़ी खत्म होती जा रही है। पुलिस के पास इतनी हथकड़ियां ही नहीं बची हैं कि वे सभी अपराधियों को हथकड़ी पहना सकें। हर थाने में 2-3 हथकड़ियां ही बची हैं, जबकि रोज 5-10 अपराधी पकड़े जाते हैं। यही नहीं, थाने और जेल से हर दिन 150-200 अपराधियों को जेल ले जाने की जिम्मेदारी पुलिस लाइन की है। पटना पुलिस लाइन के पास महज 40 हथकड़ियां ही बची हैं, जिनमें से लगभग आधी में जंग लगना शुरू हो चुका है। पुलिस का कहना है कि बरसात में तो हथकड़ी की चाबी भी काम करना बंद कर देती है। पिछले छह साल में पटना जिले को 360 हथकड़ियां ही मिली हैं, जबकि इस दौरान एक हजार हथकड़ियां जंग लगने से खराब हो चुकी हैं। पुलिस लाइन ने एक हजार हथकड़ियों की मांग की है, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है।

पटना के थानों और पुलिस लाइन में हथकड़ियां जंग खाकर टूटती जा रहीं हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो हर साल बारिश के मौसम में 100 से अधिक हथकड़ियां खराब हो जातीं हैं। हिन्दुस्तान स्मार्ट ने जब इस मामले में पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। पटना पुलिस आज भी लोहे से बनी हथकड़ी ही खरीदती है। इन हथकड़ियों को अगर नमी से बचाकर रखा जाए तो यह दस साल से अधिक चल सकती हैं, लेकिन पानी और नमी में अगर हथकड़ी रहती है तो दो से तीन साल में ही जंग लगना शुरू हो जाती है। जंग लगते ही इसकी चाबी खराब हो जाती है। पटना थाने और पुलिस लाइन में आधे से अधिक हथकड़ियों के लॉक खराब हो चुके हैं। यही कारण है कि पटना में कई बार अपराधी हथकड़ी तोड़कर भागने में सफल हो चुके हैं। कई बार तो पुलिस के पास हथकड़ी न होने के कारण भी अपराधी भाग जाते हैं।

मांग पूरी नहीं कर पा रहा विभाग
पटना में कई थाने ऐसे हैं जहां हथकड़ियों के लिए दो साल से मांग पत्र भेजा जा रहा है, लेकिन एक भी हथकड़ी आज तक नहीं मिल पाई है। पुलिस लाइन से भी कई बार मांग की गई। पांच साल में हथकड़ियों की मांग होती रही, लेकिन पुलिस लाइन को पर्याप्त हथकड़ियां ही नहीं मिलीं।

इसलिए भाग निकला मिराज
दानापुर कोर्ट में 10 जुलाई को कुख्यात मिराज ने सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जब पुलिस ने जांच की तो सामने आया कि मिराज ने ही अपने हाथों से सिपाही को गोली मारी थी। उसके दोनों हाथों में हथकड़ी नहीं थी। अगर हथकड़ी होती तो वह गोली नहीं चला पाता। सूत्रों की मानें तो उस दिन जितने अपराधी पेशी पर थे, उतनी हथकड़ियां थी ही नहीं।  

हथकड़ी की कमी पूरी कराई जाएगी। अगर स्टॉक में नहीं होगी तो इसकी भी व्यवस्था कराई जाएगी। 
— नैय्यर हसनैन खां, आईजी प्रोविजन 

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