निजी अस्पताल मोटी कमाई के चक्कर में ‘मौत’ को दे रहे दावत

Malay, Last updated: Sun, 29th Mar 2020, 11:27 AM IST
कोरोना के खौफ के बीच निजी अस्पतालों की कमाई बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में आइसोलेनशन में डाल देने का डर और संक्रमण का खतरा मरीजों का कदम रोक दे रहा है। सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक कोरोना को लेकर...
PMCH

कोरोना के खौफ के बीच निजी अस्पतालों की कमाई बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में आइसोलेनशन में डाल देने का डर और संक्रमण का खतरा मरीजों का कदम रोक दे रहा है। सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक कोरोना को लेकर मारामारी चल रही है। सरकारी अस्पतालों की इस भीड़ में चांदी काट रहे प्राइवेट अस्पताल खतरा भी बन सकते हैं। थोड़ी सी चूक से संक्रमण का दायरा बढ़ सकता है। पूर्व में ऐसी चूक हो चुकी है जिससे पटना सहित प्रदेश के अन्य जिलों में संक्रमण की चेन बन गई है। ऐसे मामलों के सामने आने के बाद सिविल सर्जन ने आदेश जारी कर प्राइवेट अस्पतालों को अलर्ट किया है।

सैफ के मामले में चूक का खामियाजा भुगत रहे हैं लोग : सैफ कतर से आया प्रदेश का पहला कोरोना मरीज था जिसकी इलाज के दौरान पटना एम्स में मौत हो गई थी। सैफ की मौत के बाद जब पड़ताल की गई तो निजी अस्पतालों की बड़ी मनमानी सामने आई। मुंगेर से लेकर पटना तक में सैफ का इलाज किया गया और कहीं भी कोरोना की आशंका को लेकर सावधानी नहीं बरती गई।  प्राइवेट अस्पताल की इस छोटी सी लापरवाही से अब तक सौ से अधिक लोगों को संदिग्ध पाया गया है और उनकी जांच के लिए नमूना भेजा गया है। मुंगेर के अस्पताल के  बाद पटना के एक निजी अस्पताल ने भी वही मनमानी की है। इस मनमानी के कारण एक दो नहीं दर्जनों लोगों की मुश्किल बढ़ गई है। 

बाइपास के अस्पातलों को लेकर बढ़ी चिंता 
पटना में झोलाछाप डॉक्टरों से लेकर बाईपास एरिया में चल रहे अस्पताल बड़ी चुनौती हैं। अस्पताल में काम करने वाले अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी व्यवस्था पर भारी पड़ सकते  हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर एक भी चूक हो गई तो सारा लॉक डाउन फेल हो जाएगा। ऐसे में अस्पतालों की मानीटिरंग को लेकर बड़ा प्लान किया जा रहा  है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर सिविल सर्जन कायार्लय में एक आपात बैठक भी हुई है जिसके बाद निजी अस्पतालों को गाइड लाइन भी जारी की गई है। इस  गाइड लाइन में साफ कहां गया है कि किसी भी मरीज के इलाज के दौरान हर तरह से सावधानी बरती जाए। कोरोना का मरीज हो या सामान्य मरीज हो इलाज को लेकर हर  स्तर से सावधानी बरती जाए। किसी भी दशा में कोई चूक नहीं की जाए जिस कारण से समस्या उत्पन्न हो। 

सुरक्षा मानकों का नहीं है पालन 
पटना में दर्जनों की संख्या में ऐसे अस्पताल हैं जहां सुरक्षा के मानकों का कभी पालन नहीं होता है। पूर्व में भी कई बार इसका खुलासा हो चुका है। इसके बाद भी सख्ती नहीं  की गई है। मौजूदा समय में तो कोरोना को लेकर अलर्ट है और ऐसे छोटे अस्पताल और नर्सिंग होम में थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। पटना में पूर्व में ऐसे दर्जनों  मामले सामने आए हैं जिसमें इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। छोटे अस्पताल और झोलाछाप डॉक्टरों के साथ बड़े अस्पतालों पर भी  लापरवाही का आरोप लगा है। आए दिन आक्रोशित लोगों का शिकार ऐसे अस्पताल बनते हैं लेकिन शिकंजा नहीं कसा जाता है। बात वर्ष 2019 की करें तो पाटलिपुत्रा और पीरबहोर थाना में आधा दर्जन मुकदमा दर्ज किया गया है।

डॉक्टरों से अपील की गई है कि वह सुरक्षा को लेकर हर सावधानी बरतें, किसी भी दशा में कोई चूक नहीं हो इसका पूरा ख्याल रखें। निजी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है  कि वह अपने अस्पताल के सामने पोस्टर बैनर लगाकर लोगों को जागरुक करें साथ ही मरीजों के इलाज में पूरी सावधानी बरतें। अस्पताल कर्मचारियों को भी कोरोना को  लेकर सतर्क और सावधान रहने के लिए जागरूक करें। 
- डॉ. राज किशोर चौधरी, सिविल सर्जन पटना  

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें